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  • June 11, 2026
  • Last Update June 10, 2026 11:53 AM
  • Lucknow

बुलंदशहर में शीतलहर का कहर: बर्फीली हवाओं के आगे बेबस लोग, अलाव बना सर्दी का सबसे बड़ा सहारा

बुलंदशहर में शीतलहर का कहर: बर्फीली हवाओं के आगे बेबस लोग, अलाव बना सर्दी का सबसे बड़ा सहारा

बुलंदशहर: उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में पड़ रही कड़ाके की ठंड और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रही बर्फीली हवाओं ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। जहांगीराबाद सहित पूरे क्षेत्र में न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। सुबह और शाम के समय चल रही शीतलहर के कारण आमजन का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।

अलाव बना सहारा

भीषण ठंड से राहत पाने के लिए अब अलाव ही लोगों का सबसे बड़ा सहारा बन गया है। शहर के चौराहों, बस स्टैंड, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर सुबह से लेकर देर शाम तक अलाव जलते नजर आ रहे हैं। लोग लकड़ी, गत्ते और अन्य उपलब्ध सामग्री एकत्र कर आग जला रहे हैं, ताकि शरीर को कुछ गर्माहट मिल सके।

इस कड़ाके की ठंड का सबसे अधिक असर दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, ठेला संचालकों और फुटपाथ पर रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। रोजी-रोटी के लिए इन्हें ठंड के बावजूद बाहर निकलना पड़ता है। ऐसे में सड़क किनारे जलता अलाव उनके लिए राहत का एकमात्र साधन बना हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अलाव केवल ठंड से बचाव का जरिया नहीं, बल्कि आपसी मेलजोल का केंद्र भी बन गया है। लोग अलाव के चारों ओर बैठकर खेती-बाड़ी, मौसम की मार, स्थानीय समस्याओं और राजनीति जैसे विषयों पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड बढ़ने से हृदय रोग, सांस की बीमारी और बुजुर्गों की स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि देखी जा रही है। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि अत्यधिक आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें, शरीर को पूरी तरह ऊनी कपड़ों से ढक कर रखें और अलाव के पास बैठते समय सावधानी बरतें। साथ ही बंद कमरे में अंगीठी या कोयले की आग जलाकर सोने से बचें, क्योंकि इससे दम घुटने का खतरा रहता है और यह जानलेवा साबित हो सकता है।

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