गाजियाबाद: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमा से सटा लोनी इन दिनों प्रशासनिक कार्रवाई और जनसमस्याओं के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक ओर सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने, अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने और कानून व्यवस्था को सख्त बनाने के लिए प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है, तो दूसरी ओर बिजली, पानी, सड़क, सफाई, प्रदूषण और अपराध जैसी समस्याएं स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या केवल कार्रवाई से विकास की तस्वीर पूरी हो सकती है, या फिर बुनियादी सुविधाओं को भी समान प्राथमिकता देना जरूरी है?
अवैध कब्जों पर कार्रवाई से मिला सख्त संदेश
बीते दिनों लोनी में प्रशासन ने कई बड़ी कार्रवाइयों को अंजाम दिया। ट्रॉनिका सिटी सेक्टर-8 स्थित यूपीसीडा की करोड़ों रुपये मूल्य की ग्रीन बेल्ट भूमि से अवैध कब्जा हटाते हुए तीन मंजिला मजारनुमा ढांचे को ध्वस्त किया गया। पूरे अभियान के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
इसी क्रम में प्रमुख बाजारों और संपर्क मार्गों से अवैध टीन शेड तथा सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण हटाए गए, जिससे यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी। वहीं गुलाब वाटिका कॉलोनी में अवैध रूप से संचालित पैकेजिंग गोदाम में लगी भीषण आग पर दमकल विभाग ने समय रहते नियंत्रण पाकर बड़ी दुर्घटना टाल दी।
अपराध पर लगाम अभी भी बड़ी चुनौती
प्रशासनिक सख्ती के बावजूद अपराध की घटनाएं पूरी तरह थमती नजर नहीं आ रहीं। हाल ही में मामूली विवाद के बाद एक ऑटो चालक की सरेआम चाकू मारकर हत्या ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन इस घटना ने लोगों के मन में असुरक्षा की भावना को और गहरा किया।
इसके अलावा महिलाओं के खिलाफ बढ़ती आपराधिक घटनाएं तथा रिहायशी क्षेत्रों में बिना फायर एनओसी और आवश्यक स्वीकृतियों के संचालित कारखाने व गोदाम भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को भी बढ़ाते हैं।
बुनियादी सुविधाओं की बदहाली से बढ़ी नाराजगी
लोनी की सबसे बड़ी समस्या आज भी मूलभूत नागरिक सुविधाएं हैं। लगातार बिजली कटौती के कारण पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। कई इलाकों में महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी भी जाहिर की।
सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं कही जा सकती। वार्डों में कूड़े के ढेर, जाम नालियां और गंदगी संक्रामक बीमारियों के खतरे को बढ़ा रही हैं। हालात इतने बिगड़े कि कई स्थानों पर लोगों को नगर पालिका कार्यालय तक पहुंचकर विरोध दर्ज कराना पड़ा।
सड़कें टूटीं, प्रदूषण बढ़ा, स्वास्थ्य पर खतरा
दिल्ली-सहारनपुर मार्ग समेत लोनी की कई प्रमुख और आंतरिक सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। गड्ढों से भरी इन सड़कों पर रोजाना हजारों लोग परेशानी झेलते हैं। युवाओं और छात्रों ने भी सोशल मीडिया अभियान चलाकर प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश की।
दूसरी ओर ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला रासायनिक पानी और प्रदूषित धुआं आसपास की आबादी के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की शिकायतें भी लगातार बढ़ रही हैं।
विकास की असली कसौटी
लोनी में अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई और सरकारी भूमि को मुक्त कराना निश्चित रूप से प्रशासन की उपलब्धि है। लेकिन किसी भी क्षेत्र का वास्तविक विकास तभी माना जाएगा, जब कानून व्यवस्था के साथ-साथ नागरिकों को निर्बाध बिजली, स्वच्छ पानी, बेहतर सड़कें, प्रभावी सफाई व्यवस्था और सुरक्षित वातावरण भी उपलब्ध हो।
लोनी के लिए अब आवश्यकता केवल तात्कालिक अभियानों की नहीं, बल्कि ऐसी दीर्घकालिक और समग्र विकास योजना की है जो प्रशासनिक सख्ती के साथ जनसुविधाओं को भी समान महत्व दे। तभी यह क्षेत्र वास्तव में विकास की नई पहचान बना सकेगा।


