नई दिल्ली: भारतीय किसान यूनियन (मनीष) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एडवोकेट एम. जिया मलिक ने जंतर-मंतर पर विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के मुद्दे पर सरकार से सकारात्मक पहल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती इसी में है कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उनका समाधान खोजने का प्रयास किया जाए।
अपने जारी बयान में एडवोकेट मलिक ने कहा कि देश के युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि वे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर संवैधानिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, तो सरकार को उनके साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। उनका मानना है कि बातचीत और विश्वास के माध्यम से किसी भी विवाद का समाधान निकाला जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगना या देना अलग विषय हो सकता है, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी है कि वह छात्रों की चिंताओं को समझे और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार के लिए ठोस आश्वासन दे। इससे युवाओं का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत होगा।
एडवोकेट जिया मलिक ने यह भी कहा कि आंदोलन में शामिल पूर्व वैज्ञानिक सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। ऐसे में सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आंदोलनकारियों से वार्ता करनी चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने पूर्व के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र में संवाद और सहमति की परंपरा रही है। अतीत में भी विभिन्न सामाजिक आंदोलनों के दौरान सरकारों ने बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया है। यही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप रास्ता है।
अंत में एडवोकेट मलिक ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति को सम्मान देना और शांतिपूर्ण आंदोलनों को सुनना किसी भी जिम्मेदार सरकार का दायित्व होता है। सरकार यदि समय रहते आंदोलनरत छात्रों से संवाद करती है, तो इससे सकारात्मक वातावरण बनेगा और समस्याओं के समाधान का रास्ता भी प्रशस्त होगा।


