संतकबीरनगर: जिलाधिकारी/कलेक्टर आलोक कुमार की अदालत ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए उदय प्रताप नारायण चतुर्वेदी की अपील को खारिज कर दिया। यह मामला ग्राम भिटहा, तप्पा फिदाईपुर, तहसील धनघटा की बंजर भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़ा था।
दरअसल, तहसीलदार धनघटा की अदालत ने 3 जून 2025 को वाद संख्या टी-202517650101583 (सरकार बनाम उदय प्रताप चतुर्वेदी) में राजस्व संहिता की धारा 67(1) के तहत बेदखली का आदेश पारित किया था। उसी आदेश के खिलाफ चतुर्वेदी ने जिलाधिकारी न्यायालय में अपील की थी।
अपीलकर्ता ने दावा किया कि भूमि पर उनका अवैध कब्जा नहीं है और उन्होंने केवल अपनी निजी भूमिधरी जमीन की सुरक्षा के लिए चारदीवारी बनाई थी। जबकि सरकारी पक्ष ने दलील दी कि अपीलकर्ता ने बंजर भूमि पर पक्का निर्माण कर कब्जा किया है।
चकबंदी लेखपाल व तहसील लेखपाल की संयुक्त रिपोर्ट और अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर जिलाधिकारी ने पाया कि गाटा संख्या 33मि की 0.075 हेक्टेयर बंजर भूमि पर मकान और सहन के रूप में कब्जा किया गया है। न्यायालय ने साफ कहा कि बंजर भूमि कृषि जोत की श्रेणी में नहीं आती और उस पर कब्जाधारी को किसी प्रकार का स्वत्व लाभ नहीं दिया जा सकता।
अंततः जिलाधिकारी न्यायालय ने 8 सितंबर 2025 को आदेश पारित करते हुए अपील को निरस्त कर दिया और तहसीलदार धनघटा का बेदखली आदेश बरकरार रखा। साथ ही निर्देश दिया गया कि पत्रावली अवर न्यायालय को वापस भेजी जाए और वाद अभिलेख को राजस्व अभिलेखागार में संरक्षित किया जाए।


