गाजियाबाद: दिल्ली से सटे गाजियाबाद की ट्रोनिका सिटी पिछले 35 सालों से बुनियादी सुविधाओं के गंभीर अभाव से जूझ रही है। उत्तर प्रदेश औद्योगिक परिषद (यूपीसीडा) द्वारा विकसित किए गए इस औद्योगिक क्षेत्र में हजारों फैक्ट्रियाँ और व्यावसायिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं, जहाँ लाखों लोग रोजगार पाते हैं। इसके बावजूद क्षेत्र की स्थिति आज भी जर्जर बनी हुई है। स्थानीय निवासी हो या व्यापारी-हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि आखिर जिम्मेदार कौन?
पेयजल व्यवस्था ठप- ट्यूबवेल बने, पर आपूर्ति शुरू नहीं
ट्रोनिका सिटी में पेयजल की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है।
मौजूद ट्यूबवेल होने के बाद भी: जलापूर्ति आज तक शुरू नहीं की गई
घरों तक पाइपलाइन कनेक्शन नहीं पहुँचाए गए
विस्तार कार्य वर्षों से लटका हुआ है
निवासियों का कहना है कि पानी के लिए उन्हें निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो महंगा और अस्थिर विकल्प है।
जलनिकासी ध्वस्त- सड़कों पर महीनों जलभराव
बारिश के समय ट्रोनिका सिटी की सड़कें तालाब बन जाती हैं।
न तो सीवरेज की उचित व्यवस्था है और न ही नालियों का रखरखाव।
बरसात का पानी और सीवेज का रिसाव मिलकर: सड़कें डुबो देते हैं
व्यापारियों के गोदामों में पानी घुस जाता है
फैक्ट्रियों के संचालन पर असर पड़ता है
परिवहन सुविधा नदारद- निजी वाहनों पर निर्भरता
ट्रोनिका सिटी में किसी भी प्रकार की सरकारी बस सेवा उपलब्ध नहीं है।
कामकाजी लोग, निवासी, फैक्ट्री कर्मचारी सभी को निजी वाहनों या महंगे ऑटो/ई-रिक्शा पर निर्भर रहना पड़ता है।
स्वास्थ्य सेवा की भारी कमी
क्षेत्र में न तो सरकारी अस्पताल मौजूद है और न ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।
आपातकालीन स्थिति में लोगों को लोनी, गाजियाबाद या दिल्ली भागना पड़ता है।
उद्योग क्षेत्र होने के बावजूद बेसिक फर्स्ट-एड सेंटर तक उपलब्ध नहीं है।
10% हस्तांतरण शुल्क- अन्य प्राधिकरणों से कई गुना अधिक
यूपीसीढा द्वारा 10% तक हस्तांतरण शुल्क वसूला जाता है, जबकि
नॉएडा: 2.5%
ग्रेटर नॉएडा: 2.5%
यमुना प्राधिकरण: 5%
अलॉटियों का कहना है कि यह शुल्क अनुचित है और आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है।
बैंक लोन न मिलने की समस्या
कई अलॉटियों को बैंक लोन उपलब्ध नहीं हो रहा।
नए प्लॉट खरीदने वाले लोग भी ऋण सुविधा न मिलने के कारण परेशानी में हैं।
बैंक द्वारा दस्तावेजों को लेकर भी लगातार आपत्तियाँ उठाई जा रही हैं।
07 नवंबर 2025 की समयवितरण शुल्क अधिसूचना पर भी विरोध
स्थानीय नागरिकों और एसोसिएशन का कहना है कि: पहले बुनियादी सुविधाएँ विकसित की जाए। उसके बाद ही किसी भी प्रकार के समयवितरण शुल्क का प्रस्ताव लागू किया जाए। लोगों ने मांग की है कि 07/11/2025 से लागू होने वाली अधिसूचना को रोक दिया जाए।
मीडिया से बचते अधिकारी, गाइडलाइन का भी उल्लंघन
सूत्रों के अनुसार मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा संपर्क किए जाने पर यूपीसीढा अधिकारी जवाब देने से बचते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि राज्य सरकार की गाइडलाइन का लगातार उल्लंघन हो रहा है।
दिल्ली से लगा क्षेत्र-फिर भी सुविधाओं के लिए मोहताज
देश की राजधानी से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर बसे इस क्षेत्र की समस्याएँ आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
निवासियों का कहना है कि इसकी जिम्मेदारी: यूपीसीडा अधिकारियों और जिलाधिकारी गाजियाबाद दोनों की है, जो अब तक किसी भी कार्ययोजना को धरातल पर उतारने में नाकाम साबित हो रहे हैं।


