गाजियाबाद: जनपद में टीबी उन्मूलन अभियान तेजी पकड़ रहा है और इसी कड़ी में जिले की 49 ग्राम पंचायतें इस वर्ष टीबी मुक्त पंचायत का दर्जा पाने की रेस में शामिल हो चुकी हैं। आगामी दिनों में 10 सदस्यीय कमेटी इन पंचायतों का विस्तृत सर्वे कर दावों का सत्यापन करेगी, जिसके बाद अंतिम रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनिल यादव ने बताया कि किसी भी पंचायत को टीबी मुक्त घोषित करने के लिए कई महत्वपूर्ण मानकों को पूरा करना जरूरी है। इनमें गांव की आबादी के कम से कम तीन प्रतिशत लोगों की टीबी जांच, आबादी के अनुपात में सीमित टीबी मरीजों की पुष्टि, टीबी पॉजिटिव मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत डीबीटी की कम से कम एक किस्त का भुगतान, तथा सभी मरीजों के यूनिवर्सल ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्ट (UDST) शामिल है।
कुल 162 पंचायतों की स्क्रीनिंग में 49 पंचायतें सभी मानकों पर खरी उतरी हैं। इनमें मुरादनगर ब्लॉक की 27 पंचायतें, रजापुर की 15, लोनी की 6 और भोजपुर ब्लॉक की 1 पंचायत शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि पांच पंचायतें बहादुरपुर, बंदीपुर, मतौर और कोतवालपुर लगातार तीसरे साल टीबी मुक्त का दावा कर रही हैं। यदि ये पुनः प्रमाणित होती हैं, तो इन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाएगा।
पिछले वर्ष 42 पंचायतों ने दावा किया था, जिनमें से 24 को टीबी मुक्त घोषित किया गया। उससे पहले 2023-24 में कुल 10 पंचायतें इस उपलब्धि तक पहुँची थीं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार लगातार जागरूकता, स्क्रीनिंग और उपचार कार्यक्रमों के कारण जिले में टीबी नियंत्रण की स्थिति लगातार सुधर रही है और कई पंचायतें मॉडल के रूप में उभर रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस बार जिले की टीबी मुक्त पंचायतों की संख्या और बढ़ेगी, जिससे गाजियाबाद टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगा।


