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  • 02/03/2026
  • Last Update 01/03/2026 8:01 pm
  • Lucknow

जिला अस्पताल में अनुशासनहीनता पर सख्त हुए सीएमओ, पोस्टमार्टम से मना करने पर तीन चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस

जिला अस्पताल में अनुशासनहीनता पर सख्त हुए सीएमओ, पोस्टमार्टम से मना करने पर तीन चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस

महराजगंज: जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम ड्यूटी से इनकार करने के मामले को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने गंभीरता से लेते हुए तीन चिकित्सकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सीएमओ ने संबंधित चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ-साथ उनका दो-दो दिन का मानदेय भी रोक दिया है। इसके अलावा मामले में समय से संतोषजनक जवाब न मिलने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

नोटिस जारी किए गए चिकित्सकों में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण आनंद, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शारिक नवाज और संविदा फिजिशियन डॉ. दुर्गेश शुक्ला शामिल हैं। सीएमओ कार्यालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि जिला अस्पताल में शवों के पोस्टमार्टम के लिए पूर्व से चिकित्सकों की ड्यूटी निर्धारित थी, इसके बावजूद ड्यूटी से इनकार किया गया।

पत्र के अनुसार, 12 दिसंबर को फार्मासिस्ट के.के. पटेल ने आधुनिक चीरघर से संबंधित कार्यों के लिए डॉ. शारिक नवाज से संपर्क कर पोस्टमार्टम ड्यूटी की सूचना दी, लेकिन उन्होंने ड्यूटी करने से साफ मना कर दिया। इसके बाद फार्मासिस्ट द्वारा डॉ. प्रवीण आनंद और डॉ. दुर्गेश शुक्ला से भी फोन पर संपर्क किया गया, परंतु दोनों चिकित्सकों ने भी पोस्टमार्टम ड्यूटी करने से इनकार कर दिया।

सीएमओ कार्यालय ने इसे उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना बताते हुए कहा कि यह आचरण राजकीय कार्यों के प्रति लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पोस्टमार्टम ड्यूटी आपातकालीन सेवाओं की श्रेणी में आती है, जिसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इस संबंध में सीएमओ डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने कहा कि जिला अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य इकाई में आपात सेवाओं से जुड़े कार्यों को हल्के में लेना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक कानूनी और प्रशासनिक दायित्व भी है, जिसका समय पर और निष्पक्ष रूप से पूरा होना आवश्यक है।

सीएमओ ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित अवधि में तीनों चिकित्सकों की ओर से संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी और पूरा प्रकरण शासन को भेजा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से जिला अस्पताल में अनुशासन और जवाबदेही को लेकर स्पष्ट संदेश गया है कि आपात सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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