कुशीनगर: सेवरही विकासखंड अंतर्गत सलेमगढ़ ग्राम पंचायत के मिया टोला स्थित अपने आवास पर शुक्रवार को जनपद में पत्रकारिता के भीष्म पितामह कहे जाने वाले रामअधार द्विवेदी ने अपनी जीवन संगिनी स्वर्गीय प्रभावती देवी की प्रथम पुण्य तिथि अत्यंत सादगी, मौन और सेवा भाव के साथ मनाई। इस अवसर पर न कोई मंच था, न भाषण और न ही औपचारिक कार्यक्रम। यह दिन केवल स्मृति, संवेदना और मानवीय करुणा का प्रतीक बना।
पुण्य तिथि के अवसर पर श्री द्विवेदी द्वारा जरूरतमंद एवं असहाय लोगों के बीच गर्म कपड़े और भोजन का वितरण किया गया। इस दौरान उपस्थित शुभेच्छुओं, ग्रामीणों, पत्रकारों और परिजनों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई आयोजन नहीं, बल्कि उनके हृदय का मौन है, जो सेवा के रूप में बाहर आया है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि सच तो यह है कि आज भी कुछ बोलने या लिखने की शक्ति नहीं बची है।
उन्होंने कहा कि स्व. प्रभावती देवी केवल उनकी पत्नी नहीं थीं, बल्कि उनके जीवन की स्थिरता और हर संघर्ष की मौन सहयात्री थीं। एक पत्रकार के रूप में वे वर्षों से समाज को शब्द देते आए हैं, लेकिन आज उसी पत्रकार के पास अपनी निजी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। कई बार मन करता है कि कुछ लिख दूं, कुछ कह दूं, लेकिन हर बार कलम वहीं रुक जाती है।
इस अवसर पर गांव के लोगों की उपस्थिति भी विशेष रही। न किसी ने ढाढ़स बंधाया, न किसी ने भाषण दिया। सभी ने मौन रहकर अपनी संवेदना व्यक्त की। यह मौन ही स्व. प्रभावती देवी के प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि बन गया। उनकी सरलता, ममता और करुणा को आज हर आंख ने महसूस किया।
श्री द्विवेदी ने कहा कि यह दिन उनके लिए कोई तिथि नहीं, बल्कि जीवन की उस कमी का एहसास है, जो समय के साथ भी कम नहीं होती। फिर भी यह संतोष है कि उनकी स्मृति में किया गया यह छोटा सा सेवा कार्य उनके संस्कारों और विचारों को जीवित रखेगा। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उन्हें यह सामर्थ्य दें कि वे निःस्वार्थ सेवा और करुणा के मार्ग पर चलते रहें।
पुण्य तिथि के अवसर पर द्विवेदी परिवार के सभी सदस्यों ने स्व. प्रभावती देवी के चित्र पर माल्यार्पण कर सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर पत्रकार, अधिवक्ता, शिक्षक, आचार्य एवं आमजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


