नई दिल्ली: उच्च शिक्षा संस्थानों को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियम 2026 अब कानूनी जांच के दायरे में आ गए हैं। इन नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर अदालत ने शीघ्र सुनवाई का भरोसा दिलाया है। याचिका में विशेष रूप से UGC रेगुलेशन 2026 के रेगुलेशन 3(c) को चुनौती दी गई है।
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि याचिका में मौजूद सभी औपचारिक और तकनीकी कमियों को दूर किया जाए। इसके बाद अदालत मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी। CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“हमें पता है कि क्या हो रहा है।”
इस टिप्पणी को नियमों को लेकर अदालत की गंभीरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की दलील
याचिका में दावा किया गया है कि UGC के नए नियम सभी वर्गों पर समान रूप से लागू नहीं होते, जिससे सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन नियमों के तहत बनाई गई व्यवस्था समानता के संवैधानिक सिद्धांत के विपरीत है और इससे अनुच्छेद 14 और 16 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन होता है।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि यदि इन नियमों को वर्तमान स्वरूप में लागू किया गया, तो उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्तियों और शैक्षणिक ढांचे पर इसका दूरगामी और असंतुलित प्रभाव पड़ेगा।
न्यायालय से तत्काल सुनवाई की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया कि यह मामला देशभर के लाखों छात्रों, शिक्षकों और उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी जल्द सुनवाई आवश्यक है। वकील ने कहा कि नियमों के लागू होने से पहले ही यदि इस पर न्यायिक समीक्षा नहीं हुई, तो बाद में उत्पन्न विवादों को सुलझाना और कठिन हो जाएगा।
जानिए आगे की पूरी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि याचिका की सभी कमियां दूर होने के बाद इसे औपचारिक रूप से सूचीबद्ध किया जाएगा। इसके बाद मामले पर विस्तृत सुनवाई की जाएगी। फिलहाल अदालत ने किसी भी नियम पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन कोर्ट के रुख से यह साफ है कि UGC के नए नियम 2026 पर गंभीर संवैधानिक परीक्षण संभव है।
आने वाले दिनों में यह मामला उच्च शिक्षा नीति और सामाजिक संतुलन को लेकर एक अहम कानूनी बहस का रूप ले सकता है।


