कुशीनगर: यूपी के कुशीनगर जनपद से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप अब सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। कुशीनगर में गोरखपुर परियोजना निदेशक कार्यालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी पर लगे आरोपों ने हाईवे निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि नियमों और मानकों की अनदेखी कर सड़क को इस कदर खतरनाक बना दिया गया है कि आम जनता की जान जोखिम में पड़ गई है।
नेशनल हाईवे पर नियमों की अनदेखी
हमारे संवाददाता के मुताबिक एनएच-28 पर हाटा से बिहार सीमा तक कई स्थानों पर बिना तकनीकी स्वीकृति के अवैध कट बनाए जाने की बात सामने आई है। इन कटों पर न चेतावनी बोर्ड हैं, न रिफ्लेक्टर और न ही गति नियंत्रण के उपाय। नतीजतन, यहां आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है और अनेक गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
निजी लाभ के लिए नियमों से समझौता?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हाईवे से सटे कुछ ढाबों, पेट्रोल पंपों और निजी प्रतिष्ठानों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार कर कट दिलवाए गए। इसके पीछे कथित तौर पर “सुविधा शुल्क” का खेल बताया जा रहा है, जिसके कारण कार्यदायी संस्थाओं को मनमानी करने की छूट मिल गई।
रात में और खतरनाक हो जाता है सफर
बता दें, रात के समय हालात और भी भयावह हो जाते हैं। कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें खराब या बंद पड़ी हैं। डिवाइडर टूटे हुए हैं, सर्विस रोड अधूरी है और सड़क पर बने गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। इसके बावजूद न तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो रही है और न ही सुधार के ठोस कदम नजर आ रहे हैं।
लंबी तैनाती पर उठे सवाल
सबसे गंभीर सवाल परियोजना निदेशक की लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती को लेकर उठ रहा है। जानकारों का मानना है कि एक ही पद पर वर्षों तक बने रहने से निगरानी कमजोर पड़ी और कथित तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
मामले को लेकर आमजन, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधियों में रोष बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल संबंधित मंत्रालय और उच्चाधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग करेगा। साथ ही अवैध कटों को तत्काल बंद कराने, दोषी अधिकारियों व कार्यदायी संस्थाओं पर कड़ी कार्रवाई और दुर्घटनाओं की न्यायिक जांच की मांग भी की जाएगी।
जनता की सख्त चेतावनी
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह हाईवे विकास का प्रतीक बनने के बजाय भ्रष्टाचार और मौत का स्थायी गलियारा बन जाएगा।
परियोजना निदेशक कार्यालय गोरखपुर से जुड़े इस कथित मामले की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। जनहित से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को तथ्यों के साथ आगे भी सामने लाने का प्रयास जारी रहेगा, ताकि जिम्मेदारों तक जनता की आवाज पहुंच सके।


