Hindi Express News
  • 02/03/2026
  • Last Update 01/03/2026 8:01 pm
  • Lucknow

एनएच-28 में करोड़ों का खेल: सोल्डर के बिना भुगतान! कुशीनगर में हाईवे निर्माण बना भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला

एनएच-28 में करोड़ों का खेल: सोल्डर के बिना भुगतान! कुशीनगर में हाईवे निर्माण बना भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला

कुशीनगर: जनपद में एनएच-28 के सुदृढ़ीकरण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। यह कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन कराया गया है। कसया से यूपी-बिहार सीमा तक लगभग 36 किलोमीटर लंबी सड़क पर करोड़ों रुपये की लागत से मरम्मत और मजबूतीकरण का कार्य कराया गया, लेकिन स्थानीय स्तर पर गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

निर्धारित मानकों के अनुसार सड़क के दोनों किनारों पर लगभग डेढ़ मीटर चौड़ा सोल्डर (शोल्डर) बनाया जाना था, ताकि सड़क की मजबूती के साथ-साथ यातायात सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। हालांकि, कई स्थानों पर सोल्डर का कार्य अधूरा या मानक से कम चौड़ाई का दिखाई देने का आरोप है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि डीबीएम (डेंस बिटुमिनस मैकाडम) और बीसी (बिटुमिनस कंक्रीट) की परतें डाले जाने के बावजूद सोल्डर की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि सुदृढ़ीकरण के दौरान निकाले गए मिलिंग मैटेरियल के निस्तारण को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई। कार्यदायी संस्था पर अनियमित भुगतान और माप पुस्तिका में कथित गड़बड़ी के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

जागरूक नागरिकों ने इस संबंध में उच्चाधिकारियों से शिकायत की है और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि सोल्डर का कार्य पूर्ण रूप से नहीं हुआ, तो भुगतान किस आधार पर स्वीकृत किया गया। यह मामला केवल तकनीकी त्रुटि का नहीं, बल्कि वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित संस्था के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

जनहित और सड़क सुरक्षा को देखते हुए अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि एनएच-28 के सुदृढ़ीकरण कार्य की गुणवत्ता और वित्तीय प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कब तक स्पष्टता आती है।

author

Related Articles

error: Content is protected !!