रामपुर: सैदनगर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बगड़खा में इस वर्ष भी होली का पर्व आपसी सौहार्द, भाईचारे और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। गांव की गलियां रंगों से सराबोर रहीं और ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवा, बुजुर्ग और बच्चे झूमते-गाते नजर आए।

रंगों में घुला अपनापन
होली के दिन सुबह से ही गांव के चौराहों और मोहल्लों में गुलाल उड़ता दिखाई दिया। लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर गले मिलते और पर्व की शुभकामनाएं देते रहे। पुराने बगड़खा चौराहे पर ग्रामीणों का विशेष जमावड़ा रहा, जहां उत्सव का माहौल देर तक बना रहा।
वरिष्ठ पत्रकार रवि दिवाकर, विशेष दिवाकर और सारांश दिवाकर भी उत्सव में शामिल हुए और ग्रामीणों के साथ रंगों की खुशियां साझा कीं। पप्पू दिवाकर के घर के सामने बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर पारंपरिक अंदाज में होली खेली।
दिवाकर समाज की उल्लेखनीय भागीदारी
उत्सव में दिवाकर समाज के अनेक लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। दीपक दिवाकर, करण दिवाकर, संजीव दिवाकर, शंकर दिवाकर, रामचंद्र दिवाकर, बंटी दिवाकर, चरन सिंह दिवाकर, रिंकू दिवाकर, मोंटू दिवाकर, मनोज दिवाकर, दिनेश दिवाकर, सुरेश दिवाकर, कमल सिंह दिवाकर, राजेंद्र दिवाकर, मोहित दिवाकर, सुनील दिवाकर, ब्रजकिशोर दिवाकर और कैलाश दिवाकर सहित कई ग्रामीण रंगों में सराबोर नजर आए। ग्राम प्रधान नितिन सैनी ने भी ग्रामीणों के साथ होली खेलकर एकता और सौहार्द का संदेश दिया।
परंपरा और संस्कृति का संगम
बगड़खा की होली केवल रंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। यहां फूलों की होली खेलने की परंपरा आज भी जीवित है। दिवाकर समाज की “दो पल्ले वाली टोपी” की परंपरा भी आपसी सम्मान और भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि होली का असली अर्थ मनमुटाव भुलाकर एक-दूसरे के करीब आना है, और यही संदेश हर साल इस गांव से निकलकर आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचता है।
सेवा और सहयोग की भावना
दिवाकर समाज और अन्य ग्रामीण समाजों के लोग जरूरतमंदों की सहायता के लिए भी सदैव तत्पर रहते हैं। इंसानियत और सहयोग की भावना के साथ मनाया गया यह पर्व सामाजिक एकता की मिसाल बन गया।


