कुशीनगर: तहसील क्षेत्र स्थित बैष्णवी महाविद्यालय के मीटिंग हॉल में ब्रह्मर्षि समाज द्वारा भगवान परशुराम जयंती श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया।

समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती और भगवान परशुराम की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद वक्ताओं ने भगवान परशुराम के जीवन, उनके पराक्रम और सनातन धर्म की रक्षा में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने बताया कि भगवान परशुराम, महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे तथा भगवान विष्णु के आवेशावतार माने जाते हैं। उनका जन्म वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया, यानी अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर हुआ था, जिसे सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है। यह भी उल्लेख किया गया कि भगवान शिव से प्राप्त ‘परशु’ धारण करने के कारण उनका नाम परशुराम पड़ा।
मुख्य अतिथि ब्रजेश राय ने कहा कि भगवान परशुराम ने अधर्म के विरुद्ध संघर्ष कर धर्म की स्थापना की और समाज को न्याय व मर्यादा का संदेश दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष दुर्गेश राय ने उनके अद्भुत शौर्य और पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि वे शस्त्र और शास्त्र दोनों के अद्वितीय ज्ञाता थे। पूर्व विधायक शशी शर्मा ने उनके जीवन के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए उनके तप, त्याग और अनुशासन को प्रेरणादायी बताया।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भगवान परशुराम ने भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं को शस्त्र विद्या प्रदान की थी। उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों ने उपस्थित लोगों को धर्म और कर्तव्य के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया।
ब्रह्मर्षि समाज के जिला अध्यक्ष अविनाश राय, संयोजक दुर्गेश राय और संरक्षक बबलू राय सहित अनेक गणमान्य लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, बंगाल, उड़ीसा, पंजाब और दिल्ली सहित कई राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया।


