कुशीनगर: समाजसेवा और मानवीय मूल्यों की एक प्रेरक तस्वीर बुधवार को उस समय देखने को मिली, जब कसया स्थित समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में एक मासूम बच्चे का पहला जन्मदिन सादगी और गरिमा के साथ मनाया गया। यह जन्मदिन था बाबू मानवीस मौर्य का, जिसे उसके माता-पिता ने किसी होटल या भव्य समारोह की बजाय उन बुजुर्गों के बीच मनाने का निर्णय लिया।

वृद्धाश्रम में जैसे ही बच्चे के साथ उसके परिजन और मित्र पहुंचे, वहां रह रहे बुजुर्गों के चेहरों पर आत्मीय मुस्कान खिल उठी। एक बच्चे के जन्मदिन का उत्सव उनके लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनेपन और अपनत्व का एहसास लेकर आया। विदाई के समय कई बुजुर्गों की आंखें नम थीं, जो उस बच्चे में अपने खोए हुए रिश्तों की झलक देख रहे थे। यह दृश्य समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि आधुनिकता की दौड़ में हम कहीं अपने बुजुर्गों को तो नहीं खोते जा रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान वृद्धाश्रम में रह रहे सभी बुजुर्गों को भरपेट भोजन कराया गया और उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। छोटे से बालक के प्रथम जन्मदिन को सेवा, करुणा और संवेदना से जोड़ने की यह पहल वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत बन गई।
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इस अवसर पर बाबू मानवीस मौर्य के पिता विपिन मौर्य, जो उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात हैं, और माता गीता मौर्य, जो एक शिक्षिका हैं, ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही संस्कार, सेवा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव सिखाना सबसे बड़ा उपहार है। उन्होंने अपने पुत्र के उज्ज्वल भविष्य, स्वस्थ जीवन और दीर्घायु की कामना ईश्वर और बुजुर्गों से की।

वृद्धाश्रम के बुजुर्गों ने भी पूरे स्नेह और भावुकता के साथ बाबू मानवीस को आशीर्वाद दिया और उसके सुखद व सफल भविष्य की कामना की। मानवीय मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को बढ़ावा देने वाले इस सराहनीय कार्य के लिए विपिन मौर्य और गीता मौर्य की सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। यह आयोजन इस बात की मिसाल बन गया कि सेवा, अपनत्व और उत्सव जब एक धागे में बंधते हैं, तो समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं।


