गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में गुरुवार को आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में CM योगी आदित्यनाथ ने भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सनातन परंपराओं पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत की महान परंपरा उसके ऋषियों, संतों और तपस्वियों की अद्भुत महागाथा से प्रेरणा पाती है, जिनका ज्ञान न केवल देश बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए सदैव मार्गदर्शक रहा है।
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय ऋषि-महर्षियों के तप, त्याग और ज्ञान ने भारत की आत्मा को सदैव आलोकित रखा है। आज भी वही परंपरा भारतीय समाज को ऊर्जा, संस्कार और जीवन मूल्यों से जोड़ती है।
कार्यक्रम में उन्होंने अयोध्या में निर्मित श्रीराम मंदिर का भी विशेष उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह मंदिर भारतीय संस्कृति, आस्था और आत्मसम्मान का भव्य प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वहां भगवा ध्वज फहराया जाना हर देशवासी के लिए गर्व का क्षण है। योगी के अनुसार, यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, मर्यादा और सांस्कृतिक एकता का सजीव स्वरूप है।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जैन धर्म की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि पहले जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव को पूरे देश में श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। साथ ही उन्होंने उल्लेख किया कि भारत की पवित्र नगरी काशी ने चार जैन तीर्थंकरों के अवतार देखे हैं, जिससे यह शहर और अधिक आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध बन जाता है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की विविध आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराएं ही देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। यहां हर आस्था, हर संप्रदाय और हर धर्म का सम्मान होता है, यही कारण है कि भारतीय संस्कृति दुनिया में सबसे प्राचीन और प्रेरणादायक मानी जाती है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की मर्यादा हो या जैन धर्म की अहिंसा और तप की शिक्षा-भारत की भूमि हमेशा से आध्यात्मिक प्रकाश का केंद्र रही है।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि यह हम सभी का दायित्व है कि हम इस गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं, ताकि वे अपनी संस्कृति की महानता को समझें और उससे प्रेरणा प्राप्त करें।


