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  • June 11, 2026
  • Last Update June 10, 2026 11:53 AM
  • Lucknow

अमेरीका में पालक पनीर की खुशबू पर टिपण्णी पड़ी भारी, भारतीय छात्रों को मिला 1.8 करोड़ का मुआवजा, जानिए पूरा मामला

अमेरीका में पालक पनीर की खुशबू पर टिपण्णी पड़ी भारी, भारतीय छात्रों को मिला 1.8 करोड़ का मुआवजा, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: अमेरिका के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में भारतीय भोजन (पालक पनीर) की खुशबू पर टिपण्णी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब भेदभाव और सांस्कृतिक असहिष्णुता का बड़ा मामला बन गया है। कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय (University of Colorado Boulder) को भारतीय पीएचडी छात्रों के साथ कथित भेदभाव के मामले में अदालत के बाहर समझौता करना पड़ा, जिसके तहत विश्वविद्यालय को 2 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 1.8 करोड़ रुपये) का मुआवजा देना पड़ा।

जानिए क्या है पूरा मामल

यह मामला सितंबर 2023 का बताया जा रहा है। उस समय 34 वर्षीय आदित्य प्रकाश और 35 वर्षीय उर्मी भट्टाचार्य विश्वविद्यालय में पीएचडी के सेकेंड ईयर के छात्र थे। 5 सितंबर 2023 को आदित्य प्रकाश यूनिवर्सिटी परिसर में स्थित ओवन में अपना लंच गर्म करने पहुंचे। उनके टिफिन में पारंपरिक भारतीय सब्जी पालक पनीर थी। आरोप है कि विश्वविद्यालय के एक स्टाफ सदस्य ने यह कहकर खाना गर्म करने से मना कर दिया कि उससे अजीब बदबू आ रही है और इस तरह के भोजन को ओवन में गर्म नहीं किया जा सकता।

इस टिप्पणी को आदित्य प्रकाश ने अपमानजनक और सांस्कृतिक भेदभाव से जुड़ा बताया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि किसी के भोजन को बदबूदार कहना उसकी पहचान और संस्कृति का अपमान है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब ब्रोकली जैसे पश्चिमी खाद्य पदार्थों को भी ‘गंध’ के नाम पर रोका जाता है, तो क्या यह हर तरह के भोजन के प्रति समान व्यवहार है या फिर चयनित संस्कृति को निशाना बनाया जा रहा है।

आदित्य की पार्टनर उर्मी भट्टाचार्य ने भी इस मुद्दे पर उनका समर्थन किया। इसके बाद दोनों को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कई बैठकों में बुलाया गया। आरोप है कि इसी दौरान उर्मी को बिना स्पष्ट कारण बताए शिक्षिका की नौकरी से निकाल दिया गया। इतना ही नहीं, विश्वविद्यालय ने दोनों को पीएचडी की डिग्री देने से भी इनकार कर दिया।

अपने साथ हुए व्यवहार को अन्यायपूर्ण बताते हुए आदित्य और उर्मी ने कोलोराडो की जिला अदालत में विश्वविद्यालय के खिलाफ मुकदमा दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मामूली विवाद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और इसके जरिए उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिससे उनका शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य प्रभावित हुआ।

मामला अदालत में पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए समझौते का रास्ता चुना। समझौते के तहत विश्वविद्यालय को दोनों छात्रों को कुल 2 लाख डॉलर का मुआवजा देना पड़ा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने उन्हें उनकी पीएचडी डिग्री भी प्रदान की।

हालांकि, समझौते की शर्तों के तहत विश्वविद्यालय ने आदित्य प्रकाश और उर्मी भट्टाचार्य पर आजीवन प्रतिबंध भी लगा दिया है। अब वे न तो इस विश्वविद्यालय में दोबारा दाखिला ले सकेंगे और न ही यहां किसी प्रकार की नौकरी कर पाएंगे।

यह पूरा मामला अमेरिका में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय स्तर के छात्रों, खासकर भारतीय छात्रों के साथ होने वाले सांस्कृतिक भेदभाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का मानना है कि वैश्विक शिक्षा संस्थानों को विविध संस्कृतियों के प्रति अधिक संवेदनशील और समावेशी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है, ताकि इस तरह के विवाद भविष्य में न हों सके।

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