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  • 02/03/2026
  • Last Update 01/03/2026 8:01 pm
  • Lucknow

गाजियाबाद में हर जगह धूल, धुंआ और लापरवाही; AQI 460 पार, लोगों का सांस लेना हुआ दूभर, प्रशासन पर उठे सवाल

गाजियाबाद में हर जगह धूल, धुंआ और लापरवाही; AQI 460 पार, लोगों का सांस लेना हुआ दूभर, प्रशासन पर उठे सवाल

गाजियाबाद: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बाद भले ही अब ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप-4) लागू कर दिया गया हो, लेकिन गाजियाबाद की हवा इस सख्ती से पहले ही जानलेवा स्तर पर पहुंच चुकी थी। बीते सप्ताह के आंकड़े बताते हैं कि प्रशासनिक सुस्ती और आधे-अधूरे प्रयासों के चलते शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार बढ़ता गया और 460 के पार पहुंचकर “अत्यंत गंभीर” श्रेणी में दर्ज हुआ।

प्रदूषण की यह भयावह तस्वीर अचानक नहीं बनी। 8 दिसंबर को गाजियाबाद का AQI 270 और 9 दिसंबर को 275 दर्ज किया गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में था। यह वह समय था जब समय रहते सख्त कदम उठाकर हालात को संभाला जा सकता था। सड़कों पर उड़ती धूल, खुले में कूड़ा जलाने की घटनाएं, ट्रैफिक का धुआं और निर्माण स्थलों पर नियमों की अनदेखी खुलेआम देखी जा रही थी। बावजूद इसके नगर निगम और जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई।

नगर निगम ने कुछ गिनी-चुनी जगहों पर पानी का छिड़काव कराकर औपचारिकता निभा दी। न तो कचरा जलाने वालों पर सख्ती हुई और न ही प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ प्रभावी अभियान चला। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी भी सिर्फ कागजों और बैठकों तक सीमित रह गई।

10 दिसंबर को AQI 300 और 11 दिसंबर को 320 पहुंचते ही गाजियाबाद “गंभीर” प्रदूषण की श्रेणी में चला गया। इसके बाद भी निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के इंतजाम नदारद रहे। फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलता धुआं वातावरण में जहर घोलता रहा, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे रहे। नतीजा यह हुआ कि हालात और बिगड़ते चले गए।

स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब AQI 400 के पार पहुंच गया और अंततः 460 के आंकड़े ने गाजियाबाद को गैस चैंबर जैसी स्थिति में ला खड़ा किया। इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ा। बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया। अस्पतालों में सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और खांसी की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा देखा गया।

अब सवाल यह उठता है कि जब हालात पहले ही बिगड़ रहे थे, तब प्रशासन क्यों नहीं जागा? क्या हर बार की तरह इस बार भी तब तक इंतजार किया गया, जब तक स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो गई?

शहरवासियों का कहना है कि सिर्फ ग्रेप-4 लागू करना ही समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि प्रदूषण से निपटने के लिए स्थायी और प्रभावी रणनीति बनाई जाए। जब तक जिम्मेदार विभाग समय रहते सख्त और ईमानदार कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक गाजियाबाद की हवा यूं ही जहरीली बनी रहेगी और लोगों को हर सांस के साथ अपनी सेहत की चिंता करनी पड़ेगी।

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