गाजियाबाद: ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र में एक बार फिर खुलेआम कूड़ा जलाकर प्रदूषण फैलाया जा रहा है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला कचरा, प्लास्टिक और रासायनिक अपशिष्ट जगह-जगह जलाया जा रहा है, जिससे पूरा इलाका जहरीले धुएँ की चपेट में है। यह धुआँ न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि आम जनता की सेहत के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कूड़े के ढेर दिन-रात सुलगते रहते हैं। हवा में घुला धुआँ आँखों में जलन, गले में खराश, साँस लेने में तकलीफ और सिरदर्द जैसी समस्याएँ पैदा कर रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा व फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों की हालत सबसे अधिक खराब है। कई परिवारों का कहना है कि घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है।
गौरतलब है कि हाल ही में जनवरी माह के दौरान गाजियाबाद देश के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना गया था, जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुँच गया था। फरवरी में भी हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है। इसके बावजूद औद्योगिक क्षेत्र में कूड़ा जलाने की घटनाएँ लगातार जारी हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पहले भी चेतावनी दी जा चुकी है और जुर्माने लगाए गए हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका कोई ठोस असर नजर नहीं आ रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे “हवा नहीं, ज़हर” में साँस लेने को मजबूर हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कूड़ा जलाने पर सख्त प्रतिबंध लगे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि गाजियाबाद की हवा को और ज़हरीला होने से बचाया जा सके।


