गाजियाबाद: लोनी क्षेत्र के रूप नगर औद्योगिक क्षेत्र में जहां छोटी-बड़ी लगभग एक हजार फैक्ट्रियां संचालित हैं, वहीं यूपीसीडा द्वारा विकसित ट्रोनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र में वर्तमान समय में तीन हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयाँ कार्यरत हैं। इन फैक्ट्रियों में लोनी व आसपास के क्षेत्रों के करीब दो लाख गरीब मजदूर महिला एवं पुरुष रोजगार के लिए कार्य कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार श्रम विभाग की घोर लापरवाही के चलते इन औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों का खुलेआम शोषण किया जा रहा है। कम पढ़े-लिखे एवं आर्थिक रूप से कमजोर मजदूर, एनसीआर का सबसे सस्ता क्षेत्र होने तथा घर के पास काम मिलने की मजबूरी में बेहद कम मजदूरी पर काम करने को विवश हैं। महिलाओं को मात्र 6 से 8 हजार रुपये और पुरुषों को 8 से 10 हजार रुपये मासिक मेहनताना दिया जा रहा है, जो न्यूनतम मजदूरी मानकों के भी अनुरूप नहीं है।
स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब ठेकेदारी प्रथा के कारण मजदूरी समय पर नहीं मिलती। महिलाओं और नाबालिगों के शोषण के मामले भी सामने आते रहते हैं। अधिकांश मजदूरों को पीएफ, ईएसआई जैसी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है।
औद्योगिक इकाइयों में दुर्घटनाएं होने पर, सूत्रों का आरोप है कि उद्योगपति और संबंधित अधिकारी आपसी सांठगांठ कर मामलों को दबा देते हैं। अंगभंग या गंभीर हादसों के बावजूद पीड़ित मजदूरों को न्याय नहीं मिल पाता।
हैरानी की बात यह है कि जहां उद्योगपतियों के कई संगठन सक्रिय हैं, वहीं मजदूरों के अधिकारों की आवाज उठाने वाला कोई मजबूत श्रमिक संगठन क्षेत्र में दिखाई नहीं देता। मजदूरों की इस बदहाल स्थिति के लिए श्रम विभाग की निष्क्रियता को मुख्य कारण माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते श्रम कानूनों का सख्ती से पालन नहीं कराया गया, तो गरीब मजदूरों का शोषण इसी तरह जारी रहेगा। फिलहाल, ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र में “सब गोलमाल है” की कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती नजर आ रही है।


