लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कार्यरत एमओसीएच (चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य) एक बार फिर प्रशासनिक असमंजस और विभागीय टकराव का शिकार हो गए हैं। मानव संपदा पोर्टल पर उनकी ऑनलाइन वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट (एसीआर) अब तक दर्ज नहीं हो सकी है, जिस कारण सैकड़ों चिकित्साधिकारियों की पदोन्नति पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
बता दें, वर्ष 2023-24 से शासन द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि (एसीआर) को मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन भरना अनिवार्य कर दिया गया है। शासनादेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि एसीआर अपूर्ण रहती है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की पदोन्नति पर रोक लगा दी जाएगी। इसके बावजूद चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य की एसीआर अब तक पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सकी है।
आयुष में नियुक्ति, एलोपैथ में तैनाती
प्रदेश में एमओसीएच चिकित्साधिकारियों की नियुक्ति आयुष विभाग के अंतर्गत की जाती है। क्योंकि ये सभी बीएएमएस डिग्रीधारी हैं, लेकिन वर्षों से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (एलोपैथ) विभाग के अंतर्गत मुख्य चिकित्साधिकारियों के अधीन कार्य कर रहे हैं।
कार्यस्थल, जिम्मेदारी और वेतन भुगतान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाता है, जबकि सेवा अभिलेख और कैडर नियंत्रण आयुष विभाग के पास है। इसी दोहरे नियंत्रण के कारण एसीआर ऑनलाइन भरने की प्रक्रिया ठप पड़ी है।
शासनादेश के बावजूद नहीं हुआ अनुपालन
15 मई 2025 को तत्कालीन आयुष महानिदेशक मानवेंद्र सिंह ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश जारी किया था कि एमओसीएच चिकित्साधिकारियों की एसीआर मानव संपदा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से भरी जाए। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर इस आदेश का अनुपालन नहीं हो सका है। वर्तमान में भी इन चिकित्साधिकारियों की एसीआर मैनुअल रूप से ही तैयार की जा रही है।
1600 पद स्वीकृत लेकिन 600 पर ही तैनाती
उत्तर प्रदेश में चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य के लगभग 1600 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से वर्तमान में करीब 600 पदों पर ही नियुक्तियां हैं। लंबे समय से ये चिकित्साधिकारी स्वयं को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में समायोजित किए जाने की मांग कर रहे हैं लेकिन आयुष और चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय के अभाव में मामला वर्षों से अधर में ही लटका हुआ है।
पदोन्नति व्यवस्था नहीं होने से भारी नाराजगी
एमओसीएच चिकित्साधिकारियों के लिए अब तक कोई स्पष्ट पदोन्नति नीति लागू नहीं की जा सकी है। परिणामस्वरूप अधिकांश चिकित्साधिकारी उसी पद से सेवानिवृत्त हो जाते हैं, जिस पद पर उनकी नियुक्ति हुई थी। ऑनलाइन एसीआर न भर पाने की स्थिति ने उनकी आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।
भविष्य अधर में लटका
एमओसीएच चिकित्साधिकारियों का कहना है कि वे न तो पूरी तरह आयुष विभाग का हिस्सा माने जाते हैं और न ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का। इस असमंजस के चलते उनका सेवा रिकॉर्ड, एसीआर और पदोन्नति तीनों ही अधर में लटका हुआ हैं। यदि जल्द ही दोनों विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई, तो सैकड़ों चिकित्साधिकारियों का भविष्य प्रभावित होना तय है।


