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  • July 15, 2026
  • Last Update July 14, 2026 10:20 PM
  • Lucknow

ऑपरेशन मुस्कान ने लौटाई चेहरे पर हंसी और जीवन में उम्मीद, पुलिस-NGOs की साझेदारी से खिले बच्चों के चेहरे

ऑपरेशन मुस्कान ने लौटाई चेहरे पर हंसी और जीवन में उम्मीद, पुलिस-NGOs की साझेदारी से खिले बच्चों के चेहरे

गाजियाबाद: बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए चलाया जा रहा ऑपरेशन मुस्कान (Operation Muskaan) देशभर में लाखों बच्चों की जिंदगी बदल रहा है। यह पहल 2014 में गाजियाबाद पुलिस की ट्रायल परियोजना के रूप में शुरू हुई थी, जिसे जुलाई 2015 में गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया। मिशन का मुख्य उद्देश्य लापता, भागे हुए, तस्करी या शोषण के शिकार बच्चों की पहचान कर उन्हें बचाना और पुनर्वास करना है।

इस अभियान में राज्य पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल और यूनिसेफ‑समर्थित नेटवर्क मिलकर काम करते हैं। बच्चों को बचाने के लिए पुलिस रेलवे स्टेशन, बाजार, फैक्ट्री, होटल, ढाबा, निर्माण स्थल और ट्रैफिक सिग्नल जैसी जगहों पर तलाशी अभियान चलाती है। बचाए गए बच्चों की पृष्ठभूमि समझने के लिए उन्हें काउंसलिंग दी जाती है और बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश कर शेल्टर होम, ऑब्ज़र्वेशन होम या परिवार में पुनर्स्थापित किया जाता है।

ऑपरेशन मुस्कान न केवल बच्चों को सुरक्षित करता है, बल्कि बाल अधिकारों की जागरूकता भी बढ़ाता है। किशोर न्याय अधिनियम, POCSO और बाल श्रम कानूनों के तहत यह मिशन अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करता है।

अब तक ऑपरेशन मुस्कान ने भारत में हजारों लापता और शोषित बच्चों को बचाया है और कई तस्करी नेटवर्क तोड़े हैं। हालांकि पुनर्वास और शिक्षा में चुनौतियाँ बनी हैं, लेकिन निरंतर अभियान, तकनीकी डेटाबेस और सामुदायिक भागीदारी इसे और प्रभावी बना रहे हैं।

सचमुच, ऑपरेशन मुस्कान दयालु पुलिसिंग और सामाजिक न्याय का प्रतीक बनकर अनगिनत बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौटाता है।

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