गाजियाबाद: पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद क्षेत्र में पिछले कुछ समय के दौरान सामने आईं बड़ी-बड़ी नशीले पदार्थों की बरामदगियों ने शहर में सक्रिय तस्करी नेटवर्क को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। हाईटेक सोसाइटियों से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक हुई कार्रवाई यह संकेत देती है कि नशा कारोबारियों ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में अपना नेटवर्क फैलाने की कोशिश की है।
सूत्रों के मुताबिक इंदिरापुरम, राजनगर एक्सटेंशन, विजयनगर, लोनी, ट्रॉनिका सिटी, नंदग्राम और मुरादनगर ऐसे क्षेत्र हैं, जहां समय-समय पर नशे से जुड़े मामलों में कार्रवाई सामने आई है। इन घटनाओं ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जब करोड़ों रुपये के मादक पदार्थ बरामद हो रहे हैं, तब स्थानीय स्तर पर इन गतिविधियों का समय रहते पता क्यों नहीं चल पा रहा है?
हाल के अभियानों में इंदिरापुरम के एक फ्लैट से बड़ी मात्रा में ड्रग्स और नकदी बरामद होने का मामला सामने आया। वहीं विजयनगर क्षेत्र में कथित तस्करी गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की गई। जांच में यह भी सामने आया कि आधुनिक तकनीक, सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर नशीले पदार्थों की आपूर्ति किए जाने की आशंका की जांच की जा रही है।
रूरल जोन में भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं दिखी। नंदग्राम क्षेत्र से भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप की बरामदगी और मुरादनगर-ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र में नकली दवाओं व नशीले उत्पादों से जुड़े मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी है। सीमावर्ती क्षेत्रों के कारण इन इलाकों को संवेदनशील माना जाता है।
इन मामलों के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा तेज है। कई बड़ी बरामदगियां विशेष एजेंसियों या संयुक्त टीमों की कार्रवाई में सामने आईं, जिससे स्थानीय निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं। हालांकि पुलिस लगातार विशेष अभियान चलाकर तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा कर रही है।
वहीं इस बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छोटी गिरफ्तारियों या बरामदगी तक सीमित रहने के बजाय पूरे नेटवर्क की आर्थिक कड़ियों, सप्लाई चेन और कथित सरगनाओं तक पहुंचना ज्यादा जरूरी है। इसके साथ ही थाने और चौकी स्तर पर खुफिया सूचना तंत्र को मजबूत करना भी समय की मांग है।


