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  • 02/03/2026
  • Last Update 01/03/2026 8:01 pm
  • Lucknow

लाखों की लागत से बनी सड़क आधा साल भी नहीं टिकी, जनता में गहरा आक्रोश, आखिर किसने दफना दी गुणवत्ता की सच्चाई?

लाखों की लागत से बनी सड़क आधा साल भी नहीं टिकी, जनता में गहरा आक्रोश, आखिर किसने दफना दी गुणवत्ता की सच्चाई?

बुलंदशहर: जहांगीराबाद क्षेत्र में नई मंडी के सामने बनी सड़क कभी विकास का प्रतीक मानी गई थी। करीब छह माह पहले जब 90 लाख रुपये की लागत से इस सड़क का निर्माण पूरा हुआ था, तो स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई थी कि अब वर्षों पुरानी परेशानी खत्म होगी, लेकिन यह उम्मीद ज्यादा समय टिक न सकी। छह महीनों के भीतर ही यह सड़क बदहाली की ऐसी मिसाल बन गई कि लोग इसे “चलता-फिरता घोटाला” कहने लगे।

गड्ढों की मरम्मत

निर्माण के दौरान ही कुछ नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि सड़क पर डाले गए मैटेरियल की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है और काम जल्दबाजी में सिर्फ कागज़ी खानापूर्ति के लिए कराया जा रहा है। कई बार अधिकारियों को पत्र लिखकर जांच की मांग भी की गई, लेकिन शिकायतें धूल फांकती रहीं और सड़क का उद्घाटन औपचारिकता की तरह पूरा हो गया।

कुछ ही महीनों बाद सड़क पर उभर आए गड्ढों ने इन आशंकाओं को सच साबित कर दिया। जब गड्ढे गहराने लगे, तो संबंधित विभाग की ओर से पैबंद लगाकर काम चलाने की कोशिश की गई, लेकिन उन पैबंदों ने स्थिति और स्पष्ट कर दी। मानकों को ताक पर रखकर निर्माण किया गया था। हर पैबंद जैसे लोगों को यह याद दिलाने लगा कि उनके टैक्स के 90 लाख रुपये कमजोर निर्माण की भेंट चढ़ गए।

रोजाना इस सड़क से गुजरने वाले वाहन चालक सबसे अधिक परेशान हैं। टूटी सड़क पर फिसलने, गाड़ी फंसने और दुर्घटना होने का खतरा बढ़ गया है। कई बाइक सवार घायल भी हुए, जिसके बाद लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है-

“सड़क छह महीनों में ही जवाब दे गई, इसका मतलब साफ है कि निर्माण में जमकर खिलवाड़ हुआ है।”

प्रशासन की लगातार चुप्पी लोगों को और भड़का रही है। अब नागरिकों व सामाजिक संगठनों ने एक बार फिर निर्माण एजेंसी और संबंधित अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है, ताकि दोषियों को चिन्हित कर जवाबदेही तय की जा सके। उनका मानना है कि अगर इस मामले पर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र के अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में होगी।

90 लाख की लागत से बनी सड़क का छह महीनों में ही जर्जर होना न केवल भ्रष्टाचार की गंध देता है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है-क्या विकास के नाम पर जनता के पैसे की बर्बादी का सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा?

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