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  • 02/03/2026
  • Last Update 01/03/2026 8:01 pm
  • Lucknow

कुशीनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा नहीं, रोड सेफ्टी के नाम पर खुलेआम मानकों की अनदेखी, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार?

कुशीनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा नहीं, रोड सेफ्टी के नाम पर खुलेआम मानकों की अनदेखी, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार?

कुशीनगर: कसया से बिहार सीमा तक राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर चल रहे सड़क सुदृढ़ीकरण कार्य का उद्देश्य दुर्घटनाओं में कमी लाकर आम लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट बताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का आरोप है कि रोड सेफ्टी के नाम पर लगाए जा रहे सुरक्षा बैरियर मानकों के अनुरूप नहीं हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कम होने के बजाय बढ़ सकता है।

कागजों में सुरक्षा लेकिन ज़मीन पर जोखिम

आरोप है कि दुर्घटना-बहुल क्षेत्रों में लगाए जा रहे रोड सेफ्टी वैरियर केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऐसे स्थानों पर मेटल बीम क्रैश बैरियर (MBCB) को मजबूत कंक्रीट नींव पर स्थापित किया जाना अनिवार्य है जिसमें तय गहराई तक खुदाई, सीमेंट और कंक्रीट से बेस तैयार करना शामिल है।

बताया जा रहा है कि कार्यदायी संस्था द्वारा इन प्रक्रियाओं को नज़रअंदाज़ करते हुए बैरियर को केवल प्रेशर मशीन से ज़मीन में ठोक दिया जा रहा है। न पर्याप्त खुदाई हो रही है, न ही कंक्रीट का इस्तेमाल।

जानलेवा साबित हो सकते हैं बैरियर

स्थानीय जानकारों का कहना है कि इस तरह लगाए गए कमजोर बैरियर तेज रफ्तार वाहनों की टक्कर झेलने में सक्षम नहीं होते। दुर्घटना के समय इनके उखड़ने या टूटने की आशंका रहती है, जिससे वाहन को रोकने के बजाय नुकसान और बढ़ सकता है। ऐसे में चालक और यात्रियों की जान पर सीधा खतरा मंडराने लगता है।

लागत बचत या सुरक्षा से समझौता?

यह भी आरोप है कि मानक निर्माण न कर सीमेंट, कंक्रीट और श्रम लागत में भारी कटौती की जा रही है। इस कथित बचत को आपसी लाभ में बदलने की चर्चाएं हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि परियोजना स्तर पर निगरानी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं—कहा जा रहा है कि अधिकारियों की मौन स्वीकृति से यह स्थिति बनी हुई है।

जिम्मेदारी तय होगी या हादसे का इंतजार?

एनएच जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग पर यदि मानकों की अनदेखी हो रही है, तो निगरानी तंत्र और संबंधित विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी?

जनहित में तत्काल जांच की मांग

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो तथा मानकों के अनुसार दोबारा रोड सेफ्टी वैरियर लगाए जाएं। समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो एनएच-27 पर हो रही यह कथित लापरवाही भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

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