कुशीनगर: सरकारी रिकॉर्ड में जिन नहरों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाने का दावा किया जा रहा है, जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल उलट निकली। सलेमगढ़ क्षेत्र की नहर संख्या 710 और 1268 का करीब दो किलोमीटर हिस्सा मौके से गायब मिला है। सिंचाई विभाग की जांच में सामने आया कि नहर की जमीन को समतल कर उस पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जांच रिपोर्ट को तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न कब्जा हट सका और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई।
मामले ने अब किसानों के बीच गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। उनका आरोप है कि नहर को पाटे जाने से न सिर्फ सिंचाई व्यवस्था चौपट हो गई है, बल्कि बरसात के मौसम में जल निकासी का रास्ता बंद होने से फसलें भी तबाह हो रही हैं।
जांच में क्या निकला
सिंचाई खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता के निर्देश पर कराई गई आंतरिक जांच में स्पष्ट तौर पर दर्ज किया गया कि संबंधित नहर की भूमि पूरी तरह समतल हो चुकी है और मौके पर नहर का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं दिखाई देता। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया कि पहले सरकारी भूमि का दोबारा सीमांकन कराया जाए, उसके बाद नहर की पुनः खुदाई कराकर बहाल किया जाए।
हालांकि, रिपोर्ट सामने आने के बाद भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। यही वजह है कि अब स्थानीय लोग विभागीय उदासीनता के साथ-साथ संभावित मिलीभगत पर भी सवाल उठाने लगे हैं।
किसानों पर दोहरी मार
ग्रामीणों का कहना है कि सलेमगढ़ हाईवे चौराहे से बिहार सीमा की ओर जाने वाली इस सरकारी जमीन पर कब्जे का सीधा असर खेती पर पड़ा है। नहर खत्म होने से खेतों तक पानी पहुंचना बंद हो गया है, जबकि दूसरी ओर बरसात के दौरान पानी निकासी का रास्ता न रहने से खेतों में जलभराव हो जाता है। इससे रबी और खरीफ दोनों सीजन की फसलें प्रभावित हो रही हैं और किसानों को हर साल आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर किसान अब खुलकर सामने आ गए हैं। दीपक चौरसिया, मुन्ना पांडेय, विजय प्रताप (बीडीसी), नागेंद्र गुप्ता और विजय शर्मा (बीडीसी) सहित कई ग्रामीणों ने अधिशासी अभियंता बीके वर्मा को शिकायती पत्र सौंपते हुए भू-माफियाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, कब्जा हटाने और नहर की जमीन को मुक्त कराने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
विभाग का जवाब- बजट मिलने पर होगी खुदाई
इस पूरे मामले पर अधिशासी अभियंता बीके वर्मा का कहना है कि नहर की दोबारा खुदाई और समस्या के समाधान के लिए उच्चाधिकारियों को बजट की संस्तुति भेज दी गई है। बजट मिलते ही समतल की गई भूमि की दोबारा खुदाई का कार्य शुरू कराया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हटाने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने के लिए भी बजट का इंतजार जरूरी है? जब जांच रिपोर्ट खुद नहर के गायब होने और कब्जे की तरफ इशारा कर रही है, तो फिर तीन महीने बाद भी कार्रवाई शून्य क्यों है? फिलहाल यही सवाल सलेमगढ़ के किसानों के गुस्से को और बढ़ा रहा है।


