गाज़ियाबाद: इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) के 60 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ISKCON गाज़ियाबाद ने आध्यात्मिक जागरूकता को नई दिशा देने के उद्देश्य से पहली “हरे कृष्ण प्रश्नोत्तरी” ऑनलाइन क्विज़ प्रतियोगिता का शुभारम्भ किया है। इस पहल का उद्देश्य समाज, विशेषकर युवाओं को श्रीकृष्ण की शिक्षाओं, श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य ज्ञान और भारतीय वैदिक संस्कृति से जोड़ना है।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में मंदिर अध्यक्ष परम आदिकर्ता प्रभु, उपाध्यक्ष धनंजय जगन्नाथ प्रभु, जनरल मैनेजर अभिराम प्रभु, पब्लिक रिलेशंस एवं कम्युनिकेशंस हेड दयालु कन्हाई दास तथा आयोजन के तकनीकी सहयोगी Setu100 के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वक्ताओं ने प्रतियोगिता के उद्देश्य, स्वरूप और इसकी सामाजिक उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रेस वार्ता में कहा गया कि आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में युवा वर्ग तनाव, अवसाद, नशे की प्रवृत्ति, डिजिटल लत और नैतिक मूल्यों के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश और श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश जीवन में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, अनुशासन और आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
आयोजकों के अनुसार “हरे कृष्ण प्रश्नोत्तरी” केवल एक सामान्य प्रतियोगिता नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देने वाला जन-जागरण अभियान है। उन्होंने बताया कि यह पहल भारत सरकार के “नशा मुक्त भारत अभियान” की भावना को भी सशक्त करती है। यदि युवा वर्ग भक्ति, सत्संग और श्रीकृष्ण के आदर्शों से जुड़ेगा तो वह स्वाभाविक रूप से नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर सकारात्मक जीवन की ओर अग्रसर होगा।
प्रतियोगिता को सभी आयु वर्गों के प्रतिभागियों के लिए तीन चरणों लेवल-1, लेवल-2 और लेवल-3 में विभाजित किया गया है। प्रत्येक स्तर की प्रश्नावली प्रतिभागियों की आयु और ज्ञान के अनुरूप तैयार की गई है, ताकि विद्यार्थी, युवा, गृहस्थ और समाज का प्रत्येक वर्ग इसमें भाग लेकर श्रीकृष्ण के जीवन, श्रीमद्भगवद्गीता, वैदिक परंपराओं और सनातन संस्कृति का सरलता से अध्ययन कर सके।
यह प्रतियोगिता पूरी तरह ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। इच्छुक प्रतिभागी घर बैठे पंजीकरण कर इसमें शामिल हो सकेंगे। पंजीकरण प्रक्रिया प्रारम्भ हो चुकी है और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सभी तीन स्तरों की परीक्षाएँ क्रमबद्ध रूप से आयोजित की जाएंगी।
आयोजकों ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, सामाजिक संस्थाओं और युवा वर्ग से इस ज्ञान अभियान का हिस्सा बनने तथा अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का आह्वान किया। उनका कहना है कि समाज में आध्यात्मिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
प्रेस वार्ता के समापन पर वक्ताओं ने कहा कि पिछले छह दशकों में ISKCON ने केवल मंदिरों का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन का माध्यम भी बना है। श्रील ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए ISKCON गाज़ियाबाद भविष्य में भी श्रीकृष्ण भावनामृत, नैतिक जीवन मूल्यों और नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।


