बुलंदशहर: शिवकुमार अग्रवाल जनता इंटर कॉलेज में अवैध फीस वसूली, डिजिटल लाइब्रेरी को बंद रखने और कक्षाओं में अव्यवस्था जैसे गंभीर आरोपों ने सोमवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब छात्र-छात्राओं का एक समूह सीधे जिलाधिकारी के दरबार में पहुँच गया। छात्रों ने लिखित शिकायत सौंपकर बताया कि कॉलेज में नियमों का पालन नहीं होता और दान में मिली सुविधाएँ भी सही तरह से उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
जिलाधिकारी ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए तुरंत शिक्षा विभाग की एक विशेष जांच टीम कॉलेज भेजी। टीम के पहुंचते ही कैंपस में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। छात्र-छात्रा क्रमवार अपने बयान दर्ज कराने लगे।
इसी दौरान एक अप्रत्याशित घटना ने जांच के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। एक अभिभावक ने अपने बच्चे को जांच टीम के सामने डांटना शुरू कर दिया। छात्रों का आरोप है कि यह दबाव बनाने की कोशिश थी, जिससे माहौल गर्माता चला गया।
तनाव बढ़ता गया, और विवाद की स्थिति बनती देख जांच टीम ने बेहतर माहौल में अगले दिन पुनः जांच करने का फैसला लिया। लेकिन टीम के कैंपस से निकलते ही छात्र कॉलेज गेट पर बैठ गए और आरोप लगाया कि जांच को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने निष्पक्ष कार्रवाई और कॉलेज में शैक्षिक व्यवस्था सुधारने की जोरदार मांग उठाई। काफी देर तक स्थिति संवेदनशील बनी रही लेकिन टीम ने उन्हें समझाकर शांत कराया।
गौरतलब है कि जिनके खिलाफ शिकायतें की गईं, वे कॉलेज के प्रधानाचार्य हैं, जो राज्य शिक्षक पुरस्कार और राष्ट्रपति पुरस्कार जैसे सम्मानों से सम्मानित रह चुके हैं। मामले के तूल पकड़ते ही कॉलेज प्रबंधन भी हरकत में आया।
प्रबंधक सुरेंद्र अग्रवाल ने प्रधानाचार्य सीपी अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से अवकाश पर भेज दिया और वरिष्ठ प्रवक्ता जितेंद्र कुमार को कॉलेज का अस्थायी कार्यभार सौंप दिया। साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी को कॉलेज समय के दौरान अनिवार्य रूप से खोले जाने के निर्देश भी जारी कर दिए गए।
जिला विद्यालय निरीक्षक विनय कुमार ने बताया कि जांच टीम दोनों पक्षों से तथ्य इकट्ठा कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी।
फिलहाल मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है, जबकि छात्र–छात्राएं अपनी मांगों पर अडिग हैं और कॉलेज की शैक्षिक व्यवस्था में ठोस सुधार चाहते हैं।


