लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग स्थित राधा कमल मुखर्जी सभागार में आयोजित एडुस्टफ पंचम राज्यस्तरीय शैक्षिक कार्यशाला “अन्विता” के अवसर पर प्रदेश के 38 जनपदों से चयनित नवाचारी शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस गरिमामय समारोह में जनपद महराजगंज के नवाचारी शिक्षक वरेश कुमार को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट नवाचार एवं समर्पित योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया।

सम्मान समारोह में डा० प्रदीप कुमार सिंह, संयुक्त मण्डलीय शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा विभाग, लखनऊ, प्रोफेसर संजय मेघावी, प्रबंध संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा शिवशंकर सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (प्राथमिक संवर्ग) द्वारा वरेश कुमार को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि डा० प्रदीप कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों के क्षरण के बीच समाज को यदि किसी से सबसे अधिक अपेक्षा है, तो वह शिक्षक है। उन्होंने कहा कि पूर्व में समाज की दिशा गुरुकुल तय करता था, इसलिए आज के परिप्रेक्ष्य में बेसिक शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
प्रोफेसर संजय मेघावी ने कहा कि परिवर्तन के इस युग में सामाजिक मूल्यों के ह्रास को रोकने के लिए शिक्षक को केवल अध्यापन तक सीमित न रहकर गुरु की भूमिका निभानी होगी।
मुख्य वक्ता शिवशंकर सिंह ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे स्वयं को कर्मचारी या नौकर न मानते हुए विद्यालय की शैक्षिक व सामाजिक गतिविधियों के केंद्र में रहकर कार्य करें।
वरेश कुमार की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर खण्ड शिक्षा अधिकारी शिव कुमार, एसआरजी सत्यप्रकाश वर्मा, कृष्ण मोहन पटेल, लवकुश वर्मा, अकादमिक रिसोर्स पर्सन राकेश यादव, अवनीश उपाध्याय, अरविंद पाण्डेय, महेन्द्र चौहान, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ पनियरा के अध्यक्ष नीरज राय, हरीश शाही, संजय मौर्या, मंत्री सुनील मिश्रा, राजेश यादव, संजय पासवान सहित अनेक शिक्षकों व शिक्षाविदों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।


