कुशीनगर: शनिवार सुबह कुशीनगर की सड़कों पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को आस्था से भर दिया। विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग जैसे ही जनपद की सीमा में पहुंचा, राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग इसे अपने जीवन का दुर्लभ क्षण मानते हुए हाथ जोड़कर नमन करते दिखे, जबकि कई लोग समय पर सूचना न मिलने से केवल तस्वीरें और वीडियो देखकर ही संतोष करते नजर आए।

देर रात कुशीनगर पहुंचे इस विशाल शिवलिंग ने सुबह होते ही तमकुहीराज, लतवाचट्टी, सलेमगढ़ टोल प्लाजा और सलेमगढ़ बाजार से होते हुए बिहार की ओर अपनी यात्रा शुरू की। मार्ग में पड़ने वाले हर कस्बे और चौराहे पर लोगों ने फूलों की वर्षा कर, धूप-दीप जलाकर और “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ इसका स्वागत किया। कुछ देर के लिए यातायात थमा जरूर, लेकिन भक्ति और श्रद्धा का उत्साह लोगों के चेहरे पर साफ झलकता रहा।
यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तैयार किया गया है और इसे विशेष रूप से सड़क मार्ग से उत्तर भारत लाया जा रहा है। ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित इस शिवलिंग की ऊंचाई और गोलाई दोनों 33-33 फीट हैं, जबकि इसका वजन लगभग 210 मीट्रिक टन बताया गया है। इतने विशाल आकार को सुरक्षित ले जाने के लिए 111 पहियों वाले अत्याधुनिक ट्रक-ट्रॉले का सहारा लिया गया है।
शिवलिंग के चालक आलोक सिंह के अनुसार, यह भव्य शिवलिंग 5 जनवरी को बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर में विधिवत स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों में लोग इसे देखने के लिए उत्साहित हैं और हर जगह श्रद्धा के साथ इसका स्वागत किया जा रहा है।
इस अलौकिक यात्रा ने कुशीनगर ही नहीं, बल्कि पूरे मार्ग को शिवभक्ति में रंग दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनना चाहता था। यह दृश्य भारतीय संस्कृति, सनातन आस्था और धार्मिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।


