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  • July 15, 2026
  • Last Update July 14, 2026 10:20 PM
  • Lucknow

बाल विवाह के खिलाफ कुशीनगर प्रशासन का कड़ा संदेश, जागरूकता अभियान को मिला समर्थन

बाल विवाह के खिलाफ कुशीनगर प्रशासन का कड़ा संदेश, जागरूकता अभियान को मिला समर्थन

कुशीनगर: बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से चल रहे बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को कुशीनगर में प्रशासन का सशक्त समर्थन प्राप्त हो रहा है। इसी क्रम में शनिवार को पडरौना तहसील सदर परिसर में एक व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जिलाधिकारी कुशीनगर महेन्द्र सिंह तंवर एवं पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने सहभागिता कर अभियान को मजबूती प्रदान की।

कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने हस्ताक्षर अभियान में भाग लेकर बाल विवाह के विरुद्ध अपना दृढ़ संकल्प दोहराया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों, शिक्षकों, छात्रों और आम नागरिकों को बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण की शपथ दिलाई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह न केवल सामाजिक अपराध है, बल्कि यह कानूनन दंडनीय भी है और इसके प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

इस अवसर पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत स्थानीय युवाओं द्वारा एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से कम उम्र में विवाह के दुष्परिणामों जैसे बालिकाओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव, शिक्षा में बाधा, मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक असमानता को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। नुक्कड़ नाटक ने दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर किया और समाज में फैली कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता का संदेश दिया।

जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए ग्राम स्तर से लेकर जनपद स्तर तक निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की कि वे बाल विवाह की किसी भी आशंका की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने कहा कि बाल विवाह के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पुलिस ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

कार्यक्रम के अंत में प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि “बाल विवाह पर सख्त रोक तभी संभव है, जब समाज, प्रशासन और युवा वर्ग मिलकर जिम्मेदारी निभाएं।” शिक्षा, जागरूकता और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से ही बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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