गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद में तीन नाबालिग बहनों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक मामले में पुलिस की गहन जांच के बाद कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो इस त्रासदी के पीछे छिपे मानसिक संघर्ष और पारिवारिक हालात की ओर इशारा करते हैं।
पुलिस जांच के मुताबिक, मृतक बहनें।निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) कोरियन संस्कृति और ऑनलाइन गतिविधियों से गहराई से जुड़ी हुई थीं। उनके पिता चेतन कुमार को यह लगाव असामान्य लगा, जिसके बाद उन्होंने बेटियों के मोबाइल फोन छीन लिए। कुछ समय बाद उन मोबाइल फोन को बेच दिया गया। इसके बाद से ही तीनों बच्चियां लगातार मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति में थीं।

आत्महत्या की रात क्या हुआ?
पुलिस के अनुसार घटना की रात तीनों बहनों ने अपनी मां का मोबाइल फोन लिया था, लेकिन उस फोन में वे ऐप्स मौजूद नहीं थे, जिनके जरिए वे कोरियन कंटेंट या अपने ऑनलाइन दोस्तों से जुड़ पाती थीं। इससे उनकी निराशा और गहराती चली गई। जांच में यह भी सामने आया है कि बच्चियां खुद को पूरी तरह अकेला और कटा हुआ महसूस कर रही थीं।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और मोबाइल फोन को कब्जे में ले लिया। हालांकि अब तक जांच में किसी कोरियन ऐप या उस रात किसी ऑनलाइन संपर्क के ठोस डिजिटल साक्ष्य नहीं मिले हैं। मोबाइल डेटा, उंगलियों के निशान, हस्तलिखित सुसाइड नोट और अन्य सबूतों को फोरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
सुसाइड नोट का भावनात्मक पहलू
पुलिस को घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में तीनों बहनों ने अपने पिता का उल्लेख किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि बच्चियों का भावनात्मक जुड़ाव पिता से अधिक था। पुलिस इस पहलू को भी गंभीरता से जांच रही है कि पारिवारिक संवाद में कहां कमी रह गई।
पुराने मामले ने भी खींचा ध्यान
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि वर्ष 2015 में चेतन कुमार की एक लिव-इन पार्टनर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। उस समय पुलिस ने इसे आत्महत्या मानते हुए मामला समाप्त कर दिया था। वर्तमान मामले से इसका कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है, फिर भी पुलिस पृष्ठभूमि के तौर पर हर बिंदु की समीक्षा कर रही है।
फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी वैज्ञानिक और तकनीकी रिपोर्ट्स का इंतजार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।


