गाजियाबाद: लोनी के मीरपुर हिंदू गांव में रविवार दोपहर उस वक्त हालात बेकाबू हो गए, जब प्रस्तावित डंपिंग ग्राउंड के खिलाफ लंबे समय से चल रहा किसानों का विरोध उग्र हो गया। थाना ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र में किसानों और पुलिस के बीच हुई झड़प ने पूरे इलाके को तनाव की आग में झोंक दिया। हालात संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें महिलाओं और बुजुर्गों समेत कई लोग घायल हो गए।
ग्रामीणों के अनुसार किसान और स्थानीय महिलाएं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे थे। उनका कहना था कि कूड़ाघर बनने से न केवल खेती बर्बाद होगी, बल्कि आसपास के गांवों में बीमारियों, दुर्गंध और प्रदूषण का खतरा भी बढ़ेगा। इसी दौरान मौके पर पहुंची पुलिस से कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते टकराव में बदल गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को जबरन हिरासत में लेने की कोशिश की, जिससे भीड़ भड़क उठी। इसके बाद पथराव हुआ और जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। अफरातफरी के माहौल में लोग जान बचाकर खेतों और गलियों की ओर भागते नजर आए।
गांववालों का दावा है कि लाठीचार्ज में 50 से अधिक किसान और महिलाएं घायल हुई हैं। एक महिला के सिर में गंभीर चोट आई है, वहीं एक ग्रामीण का कूल्हा टूटने का आरोप लगाया गया है। कई घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि एक बुजुर्ग महिला के बेहोश होने की भी सूचना है।
प्रदर्शन कर रहे किसानों का साफ कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन गांव की जमीन पर कूड़ाघर नहीं बल्कि स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक सुविधाएं बननी चाहिए। उनका आरोप है कि पहले से मौजूद कचरे के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं और खेती प्रभावित हो रही है।
घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के गांव पहुंचने की चर्चा है, जिससे आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। मौके पर एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम समेत कई थानों की पुलिस तैनात रही। प्रशासन का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन गांव में तनाव बरकरार है। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।


