महराजगंज: नौतनवा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत हनुमानगढ़िया में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला उजागर हुआ है। सरकार द्वारा मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लागू की गई डिजिटल उपस्थिति प्रणाली अब सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार लोग एनएमएमएस ऐप का दुरुपयोग कर कागजी मजदूरों के नाम पर सरकारी धन के बंदरबांट में जुटे हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्य के लिए मस्टरोल संख्या 237 से 244 तक जारी किए गए थे। इन मस्टरोलों में एनएमएमएस ऐप पर कुल 50 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज दिखाई गई। लेकिन जब कार्यस्थल का वास्तविक निरीक्षण किया गया तो स्थिति पूरी तरह अलग मिली। मौके पर केवल 30 मजदूर ही काम करते पाए गए, जबकि रिकॉर्ड में दर्ज 20 मजदूर वहां मौजूद ही नहीं थे।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बिना काम किए ही कई मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कर भुगतान की तैयारी की जा रही थी। इससे मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यह खेल अकेले संभव नहीं है और इसमें जिम्मेदार कर्मियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
मामले में ग्राम पंचायत के रोजगार सेवक की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है। आरोप है कि उन्होंने बिना मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति के ही ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की। वहीं ब्लॉक स्तर के तकनीकी सहायकों और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना मौके का भौतिक सत्यापन किए फाइलों को पास कर देना भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण देना है।
क्षेत्रीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार का यह खेल लगातार जारी रहेगा और वास्तविक मजदूरों का हक मारा जाता रहेगा।


