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  • 02/03/2026
  • Last Update 01/03/2026 8:01 pm
  • Lucknow

कुशीनगर में चचेरे भाई-बहन का जन्मोत्सव बना मिसाल, पढ़िए भाई-भाई में दरार के दौर में एकजुट परिवार की कहानी

कुशीनगर में चचेरे भाई-बहन का जन्मोत्सव बना मिसाल, पढ़िए भाई-भाई में दरार के दौर में एकजुट परिवार की कहानी

कुशीनगर: एक तरफ जहां संयुक्त परिवार बिखरते जा रहे हैं और भाई-भाई के रिश्ते भी अक्सर मनमुटाव की भेंट चढ़ जाते हैं, ऐसे समय में कुशीनगर जनपद के सेवरही विकासखंड स्थित ग्राम सभा मुकुन्दपुर से एक प्रेरक खबर सामने आई है। यहाँ मिश्रा परिवार ने अपने आचरण से यह साबित कर दिया कि रिश्ते दिखावे या खर्च के नहीं, बल्कि समझ, त्याग और आपसी सम्मान के मोहताज होते हैं।

गुरुवार को मिश्रा परिवार के दो चचेरे भाई-बहनों सक्षम मिश्रा (पुत्र राम मिश्रा) और परी कुमारी (पुत्री श्याम मिश्रा) का जन्मदिन एक साथ, एक ही छत के नीचे, बेहद सादगी और आत्मीयता के साथ मनाया गया। यह आयोजन केवल बच्चों का जन्मोत्सव नहीं था, बल्कि समाज को दिशा देने वाला एक मौन संदेश भी था।

परिवार के बुजुर्गों और अभिभावकों ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया कि अलग-अलग कार्यक्रम कर अनावश्यक खर्च करने के बजाय, दोनों बच्चों का जन्मदिन संयुक्त रूप से मनाया जाएगा। केक कटिंग से लेकर अतिथियों के स्वागत, मिष्ठान वितरण और भोजन व्यवस्था तक सब कुछ मिल-जुलकर किया गया। इस पहल ने यह स्पष्ट कर दिया कि सादगी में ही सबसे बड़ी समृद्धि छिपी होती है।

गांव और आसपास के क्षेत्र में यह आयोजन चर्चा का विषय बना रहा। ग्रामीणों ने इसे आज के समाज के लिए एक सीख बताया, जहां अक्सर छोटी-छोटी बातों पर परिवार टूट जाते हैं। लोगों का कहना है कि मिश्रा परिवार ने यह दिखा दिया कि आपसी संवाद और सहयोग से रिश्तों को मजबूत रखा जा सकता है।

मिश्रा परिवार की एकजुटता के पीछे बुजुर्गों का मार्गदर्शन और महिलाओं की समझदारी अहम भूमिका निभा रही है। लगभग 28 सदस्यों का यह परिवार आज भी साथ रहता है और सभी पर्व-त्योहार मिलकर मनाता है। घर के अंदर ही मतभेद सुलझा लिए जाते हैं, जिससे पंचायत या बाहरी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ती।

जन्मोत्सव में परिवार के दादा भूप मिश्रा, बड़ी मां ज्ञानती देवी, भानु प्रताप मिश्रा, पूनम देवी, राम मिश्रा, सीमा देवी, श्याम मिश्रा, नीलम देवी, पृथ्वीराज, मनीष मिश्रा, शिखा कुमारी, अर्पित, काजल, साक्षी सहित अनेक परिजन और ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, दीर्घायु और सफलता की कामना की।

यह आयोजन समाज को यह संदेश देता है कि जब परिवार जुड़ा रहता है, तो वही सबसे बड़ी पूंजी बन जाता है। मिश्रा परिवार की यह पहल निस्संदेह आज के समय में अनुकरणीय है।

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