लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को समयानुकूल और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक अहम निर्णय लिया है। प्रदेश के माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े सभी अधिकारी, शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए अब तकनीकी प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत मिशन कर्मयोगी (iGOT) पोर्टल पर उपलब्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) से संबंधित पाठ्यक्रमों को पूरा करना होगा।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक और प्रशासनिक स्टाफ को इन पाठ्यक्रमों में पंजीकरण कर मार्च तक इन्हें सफलतापूर्वक पूरा करना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य केवल तकनीकी जानकारी देना नहीं, बल्कि शिक्षण पद्धतियों और प्रशासनिक कार्यों में नवाचार, पारदर्शिता और कार्यकुशलता को बढ़ावा देना है।
प्रशिक्षण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विभाग ने AI और ML आधारित प्रमुख कोर्सों की सूची पहले ही सभी संबंधित कार्यालयों को भेज दी है। नई व्यवस्था के तहत मिशन कर्मयोगी पोर्टल पर उपलब्ध 57 प्रशिक्षण कोर्सों में से प्रत्येक कर्मचारी को हर महीने कम से कम एक कोर्स पूरा करना होगा। इस तरह 31 मार्च तक कुल 12 कोर्स पूरे करना अनिवार्य किया गया है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि तकनीकी रूप से दक्ष शिक्षक और कर्मचारी न केवल डिजिटल टूल्स का बेहतर उपयोग कर सकेंगे, बल्कि डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से शिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना पाएंगे। इससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने के साथ-साथ शिक्षा तंत्र भी आधुनिक और सुदृढ़ होगा।


