प्रयागराज: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म ख़ान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। रामपुर के चर्चित क्वालिटी बार कब्ज़ा मामले में हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका मंज़ूर कर ली है।
यह भी पढ़े: UP Police में बड़ा फेरबदल, 16 IPS अफसरों का तबादला, 10 जिलों के SP बदले गए, देखिए पूरी सूची
जस्टिस समीर जैन की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही आज़म खान को तमाम मामलों में जमानत मिल गई है और उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि उनकी रिहाई के बाद रामपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है।
निचली अदालत से हाईकोर्ट तक का सफर
आजम खान ने पहले रामपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई थी, लेकिन अदालत ने 17 मई 2025 को इसे खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई पूरी होने के बाद 21 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखा गया था, जिसे अब सुनाते हुए जमानत मंजूर की गई।
मामला क्या है?
21 नवंबर 2019 को गगन अरोड़ा नामक बार मालिक ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि रामपुर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के सईद नगर हरदोई पट्टी स्थित क्वालिटी बार पर ज़बरन कब्ज़े की कोशिश की गई। तत्कालीन राजस्व निरीक्षक अनंगराज सिंह की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
इसमें आज़म खान के अलावा उनकी पत्नी डॉ. तजीन फ़ातिमा, बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आज़म खान, तथा तत्कालीन चेयरमैन सैयद ज़फर अली जाफरी को भी आरोपी बनाया गया था।
राजनीतिक असर
आज़म खान की जमानत को सपा खेमे के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। उनके जेल से बाहर आने पर रामपुर और पश्चिमी यूपी की राजनीति में सियासी समीकरण बदल सकते हैं।


