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  • July 15, 2026
  • Last Update July 14, 2026 10:20 PM
  • Lucknow

कमिश्नरेट का दावा बनाम गांवों का डर: कौन सुनेगा ग्रामीणों की पुकार? गाजियाबाद में चरमराई कानून-व्यवस्था

कमिश्नरेट का दावा बनाम गांवों का डर: कौन सुनेगा ग्रामीणों की पुकार? गाजियाबाद में चरमराई कानून-व्यवस्था

गाजियाबाद: देश के तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शुमार गाजियाबाद की पहचान अब हाईटेक पुलिसिंग, डिजिटल निगरानी और आधुनिक कानून-व्यवस्था मॉडल के रूप में पेश की जाती है। लेकिन शहर की सीमा से बाहर निकलते ही तस्वीर बदलती दिखाई देती है। जिले के ग्रामीण इलाकों—विशेषकर लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर और भोजपुर क्षेत्र के गांवों—में सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता लगातार गहराती नजर आ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी का असर गांवों के भीतर कम दिखाई देता है। मुख्य सड़क और बाजार तक तो पुलिस वाहन नजर आ जाते हैं, लेकिन गांवों के अंदरूनी हिस्सों में लोगों को अक्सर खुद ही अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना पड़ता है। चोरी, झगड़े, अवैध गतिविधियों और छोटी घटनाओं के समय त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

अपराध से पहले नहीं, बाद में दिखती सक्रियता

स्थानीय लोगों का मानना है कि कई बार पुलिस की कार्रवाई घटनाओं के बाद शुरू होती है, जबकि जरूरत पहले से सतर्क निगरानी की है। गांवों में सक्रिय बीट पुलिसिंग और नियमित संपर्क व्यवस्था कमजोर पड़ने से आपराधिक गतिविधियों पर शुरुआती नियंत्रण मुश्किल हो रहा है।

सीसीटीवी और निगरानी व्यवस्था गांवों से दूर

शहरी इलाकों में कैमरों और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के दावों के बीच गांवों के कई प्रमुख स्थान अब भी बुनियादी सुरक्षा संसाधनों से वंचित हैं। कई संपर्क मार्ग, सुनसान क्षेत्र और चौराहे पर्याप्त रोशनी और निगरानी के अभाव में जोखिमपूर्ण बने हुए हैं।

जमीन विवाद बन रहे तनाव की बड़ी वजह

ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन से जुड़े विवाद लगातार गंभीर सामाजिक तनाव का कारण बन रहे हैं। कई मामलों में समय रहते समाधान न निकलने से विवाद गहराते हैं और बाद में हिंसक झड़पों का रूप ले लेते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआती स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप और निगरानी से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

नशे के कारोबार पर भी चिंता

कुछ ग्रामीण इलाकों में नशीले पदार्थों और अवैध शराब की उपलब्धता को लेकर भी लोग चिंता जता रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इसका असर युवाओं पर पड़ रहा है और इससे सामाजिक अपराधों में वृद्धि की आशंका बढ़ रही है।

महिला सुरक्षा और रात्रि गश्त पर उठते सवाल

शाम ढलने के बाद गांवों के संपर्क मार्गों पर पुलिस की नियमित मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों के बीच असंतोष देखा जाता है। महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अंदरूनी मार्गों पर गश्त बढ़ाने की जरूरत है।

ग्रामीणों की क्या है मांग?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गांवों में पुलिस-जनसंवाद मजबूत हो, बीट सिपाहियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़े और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो। उनका मानना है कि भरोसा तभी मजबूत होगा जब पुलिस की मौजूदगी केवल कागजों में नहीं, जमीन पर भी महसूस हो।

निष्कर्ष: गाजियाबाद के ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठती चिंताएं प्रशासन के लिए गंभीर संकेत मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शहर और गांव के बीच सुरक्षा व्यवस्था की खाई को समय रहते कम नहीं किया गया, तो लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है। ऐसे में जरूरत केवल दावों की नहीं, बल्कि गांवों तक प्रभावी और भरोसेमंद पुलिसिंग पहुंचाने की है।

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