महराजगंज: उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण और संवर्धन को लेकर वन विभाग ने महराजगंज में दो दिवसीय विशेष गणना अभियान चलाया। पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के निर्देश पर आयोजित इस अभियान के तहत क्षेत्र में सारस पक्षियों की मौजूदगी, उनकी संख्या और प्राकृतिक आवासों का आकलन किया गया, ताकि भविष्य की संरक्षण योजनाओं को और प्रभावी बनाया जा सके।
अभियान के अंतर्गत उत्तरी चौक रेंज की घोड़हिया बीट में 22 और 23 जून को वनकर्मियों की टीम ने व्यापक स्तर पर निगरानी की। इस दौरान बीट क्षेत्र के विभिन्न जलाशयों, खेतों और प्राकृतिक आवासों में सारस पक्षियों की तलाश कर उनकी उपस्थिति दर्ज की गई। अभियान का नेतृत्व फोरेस्टर जितेन्द्र गौड़ ने किया, जिन्होंने टीम के साथ क्षेत्र में भ्रमण कर गणना कार्य को पूरा कराया।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस विशेष अभियान का उद्देश्य केवल सारस की संख्या का आकलन करना ही नहीं, बल्कि उनके आवासीय क्षेत्रों की स्थिति को समझना और संरक्षण के लिए आवश्यक रणनीति तैयार करना भी है। विभाग का मानना है कि सारस पक्षी की उपस्थिति किसी भी क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता का महत्वपूर्ण संकेतक होती है, इसलिए इसकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
फोरेस्टर जितेन्द्र गौड़ ने बताया कि सारस उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है और इसका संरक्षण पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विभाग हर वर्ष इस प्रकार का विशेष गणना अभियान चलाता है, जिससे सारस की आबादी, उनके निवास स्थलों और संरक्षण की जरूरतों का सही आकलन किया जा सके। इसी आधार पर आगे की योजनाएं तैयार की जाती हैं।
दो दिनों तक चले इस अभियान में जुटाए गए आंकड़ों और निरीक्षण रिपोर्ट को अब उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। रिपोर्ट के अध्ययन के बाद सारस के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और संवर्धन से जुड़ी आगे की कार्ययोजना तय की जाएगी।


