गाजियाबाद: डिजिटल दुनिया में कदम-कदम पर छिपा खतरा आखिर कितना बड़ा हो सकता है- यह गाजियाबाद में पिछले 22 महीनों में सामने आए आंकड़ों ने साफ कर दिया है। जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 तक 590 साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) के मामलों ने जिले को हिलाकर रख दिया है।
लाखों नहीं, करोड़ों नहीं, बल्कि 150 करोड़ रुपये लोगों की मेहनत की कमाई देखते ही देखते ऑनलाइन ठगों की जेब में चली गई। चौंकाने वाली बात यह कि पुलिस इतनी बड़ी ठगी में से अब तक सिर्फ 38 करोड़ रुपये ही वापस दिलवा सकी है।
साइबर ठगी का कारण बना शेयर ट्रेडिंग का लालच
सोशल मीडिया पर चमकते हुए रिटर्न, चमकदार ग्राफ और फर्जी अकादमी के विशेषज्ञों के नाम- इन सबने मिलकर गाजियाबाद के सैकड़ों लोगों को अपने जाल में फंसाया। जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 तक 310 मामलों में लोगों ने भरोसा किया और बदले में मिला सिर्फ धोखा। इस एक श्रेणी में ही 105 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
इसके बाद नंबर आया ऑनलाइन टास्क फ्रॉड का
लोगों को आसान काम देकर पैसे कमाने का लालच दिया गया। शुरुआत में 200–300 रुपये भेजकर विश्वास जीता गया, फिर प्रीमियम ग्रुप में जोड़ने के नाम पर हजारों-लाखों वसूले गए। इस चाल में 128 लोग फंसे और 20 करोड़ रुपये ठग लिए गए।
सबसे डराने वाली घटनाएं रहीं डिजिटल अरेस्ट के मामले
फर्जी कस्टम अधिकारी, CBI/ED के अधिकारी बनकर साइबर ठग वीडियो कॉल पर धमकाते थे। पीड़ित को बताया जाता कि वह किसी अपराध में शामिल है और उसे डिजिटल रूप से “अरेस्ट” किया जा रहा है। कई-कई दिनों तक निगरानी में रखकर लोगों के डर का फायदा उठाया गया और इस तरीके से 9 करोड़ रुपये हड़पे गए।
इसके अलावा, फर्जी लोन ऐप, नकली कस्टमर केयर नंबर, स्क्रीन शेयरिंग, इंश्योरेंस अपडेट जैसे कई तरीकों से 129 मामलों में लगभग 16 करोड़ रुपये की ठगी की गई। बदलते फ्रॉड पैटर्न ने पुलिस की चुनौतियां और बढ़ा दी हैं।
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी तकनीक के साथ अपने तरीके बदलते रहते हैं, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। इसी के तहत जिले में लगातार कैंप और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। साइबर टीम का स्टाफ बढ़ाया गया है और ट्रेनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कैसे बचें साइबर ठगी से?
- किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
- अज्ञात नंबर पर कॉल या मैसेज के जरिए निजी जानकारी साझा न करें।
- किसी के कहने पर एप्स, APK फाइल या स्क्रीन शेयरर एप डाउनलोड न करें।
- टीम व्यूअर, ओटीपी, बैंक डिटेल्स किसी को न बताएं।
- किसी लेन-देन से पहले हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या नंबर ही इस्तेमाल करें।
- किसी भी संदिग्ध घटना पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।
गाजियाबाद की यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि चेतावनी है- डिजिटल युग में सुरक्षा अब सिर्फ एक क्लिक की दूरी पर नहीं, बल्कि एक सही निर्णय की दूरी पर है।


