रतनपुर/महराजगंज। नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत रेहरा में सूचना का अधिकार आरटीआई कानून को ताक पर रखने और आवेदक को परेशान करने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। नियमों के तहत निर्धारित भारी-भरकम शुल्क सरकारी खाते में जमा करने के बावजूद महीनों बाद भी विकास कार्यों से संबंधित महत्वपूर्ण जन सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
इस प्रशासनिक उदासीनता और टालमटोल की नीति से क्षुब्ध होकर ग्राम पंचायत रेहरा निवासी पीड़ित आवेदक राकेश पासवान पुत्र योगेन्द्र ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल का दरवाजा खटखटाते हुए मुख्यमंत्री से मामले की ऑनलाइन लिखित शिकायत दर्ज कराई है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित राकेश पासवान ने पूरे मामले का विवरण देते हुए बताया कि उन्होंने बीते वर्ष 29 दिसंबर 2025 को आरटीआई अधिनियम के तहत एक प्रार्थना पत्र देकर ग्राम पंचायत रेहरा में पूर्व में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों, वित्तीय खर्चों और निर्माण कार्यों का बिंदुवार ब्यौरा मांगा था।
इस सूचना को प्राप्त करने के लिए नियमानुसार जो भी औपचारिकताएं थीं उन्हें पूरा करते हुए प्रार्थी द्वारा ग्राम निधि प्रथम रेहरा के आधिकारिक बैंक खाते में कुल पैंतीस हजार रुपये की धनराशि बतौर सूचना शुल्क के रूप में जमा करा दी गई थी। आरोप है कि इस पूरी विधिक प्रक्रिया को पूरे हुए और आवेदन किए कई महीने का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित जन सूचना अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी और ब्लॉक स्तरीय जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है।
पीड़ित का कहना है कि सूचना न मिलने से ऐसा प्रतीत होता है कि ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और हेरफेर की गई है, जिसे छिपाने के उद्देश्य से जानबूझकर जानकारी को दबाया जा रहा है। अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये और मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर राकेश पासवान ने अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है कि जमा किए गए शुल्क के एवज में ग्राम पंचायत रेहरा की वांछित विकास आख्या उन्हें अविलंब उपलब्ध कराई जाए और आरटीआई कानून का मखौल उड़ाने वाले व अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने वाले दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध जांच बैठाकर तत्काल सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए।


