नई दिल्ली: एशिया कप का रोमांच अपने चरम पर है। रविवार को होने वाले खिताबी मुकाबले में भारत और पाकिस्तान पहली बार आमने-सामने होंगे। टूर्नामेंट के 41 साल के इतिहास में यह मौका पहली बार आया है जब दोनों टीमें फाइनल में भिड़ेंगी। मैच के दौरान सभी की निगाहें भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव पर टिकी हुई हैं।
भारतीय टीम मौजूदा टूर्नामेंट में अब तक अजेय रही है और फाइनल तक का सफर उसने बेहद आत्मविश्वास के साथ तय किया है। ऐसे में उसके हौसले बुलंद हैं और वह चिर-प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को हराकर खिताब पर कब्जा जमाना चाहेगी। इस महामुकाबले में सभी की निगाहें भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव पर टिकी होंगी।
सूर्यकुमार यादव और टिकी निगाहें
सूर्यकुमार का टूर्नामेंट में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पाकिस्तान के खिलाफ ग्रुप मैच में रहा, जहां उन्होंने नाबाद 47 रन बनाए। उस मैच में लक्ष्य छोटा था और सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की 31 रन की ताबड़तोड़ पारी से दबाव भी कम हो गया था। हालांकि, कप्तान बनने के बाद सूर्यकुमार की बल्लेबाजी में थोड़ी गिरावट देखी गई है।
इसका एक बड़ा कारण उनका बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव करना रहा है। वह युवा खिलाड़ियों को अधिक मौके देने के लिए खुद को ऊपर-नीचे भेजते रहे। आंकड़ों पर नजर डालें तो सूर्यकुमार ने 2024 में 15 पारियों में चार अर्धशतक की मदद से 420 रन बनाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 155 का रहा और उन्होंने 40 चौके व 22 छक्के लगाए। उनकी डॉट बॉल प्रतिशत लगभग 35 रही।
नही रहा ख़ास प्रदर्शन
हालांकि, चिंता की बात यह है कि 2025 में जब टीम पहले बल्लेबाजी कर रही थी, तब उन्हें अक्सर कम गेंदें खेलने का मौका मिला। इसी कारण इस साल 10 पारियों में उन्होंने केवल 10 चौके और 3 छक्के ही लगाए। उनकी डॉट बॉल प्रतिशत लगभग 48 तक पहुंच गई है, यानी वह लगभग हर दूसरी गेंद पर रन बनाने से चूक रहे हैं।
ऐसे में फाइनल में उनकी बल्लेबाजी का जलवा भारतीय टीम की जीत और एशिया कप की ट्रॉफी के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।


