महराजगंज: नौतनवां ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत निपनिया में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महापुराण के सातवें दिन भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी माता के पावन विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और मार्मिक वर्णन किया गया। कथा के दौरान जैसे ही विवाह लीला का प्रसंग आया, पूरा पंडाल भक्ति-भाव से सराबोर हो गया और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
मंगलवार की रात्रि आयोजित कथा में कथावाचक आचार्य राहुल मिश्रा ने विस्तार से प्रसंग सुनाते हुए बताया कि विदर्भ नरेश भीष्मक का पुत्र रुक्मी अपनी बहन रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था, जबकि रुक्मिणी मन से श्रीकृष्ण को ही अपना पति मान चुकी थीं। रुक्मिणी की अटूट श्रद्धा और विश्वास से प्रेरित होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उनका उद्धार करते हुए विवाह किया। कथावाचन के दौरान धर्म की विजय, भक्ति की शक्ति और नारी की आस्था के सम्मान का संदेश प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया।
कथा में यह भी बताया गया कि अधर्म की एक सीमा होती है जहां तक क्षमा संभव है, उसके आगे न्याय आवश्यक हो जाता है। इस प्रसंग ने श्रोताओं को गहरे आध्यात्मिक चिंतन में डुबो दिया। विवाह लीला का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और कई श्रोता भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए।
कार्यक्रम में विजय कुमार चौरसिया, रामरतन चौरसिया, महेश चौरसिया, धर्मेंद्र चौधरी, दर्शन चौधरी, भगवती चौधरी, बृजमोहन चौधरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण व आसपास के श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन समिति की सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं के बीच प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ।


