गाजियाबाद: मानसून की पहली तेज बारिश ने लोनी की तैयारियों की असल तस्वीर सामने ला दी। कुछ ही घंटों की बारिश के बाद दिल्ली-सहारनपुर मार्ग, लोनी तिराहा, पावी, परमहंस विहार समेत कई प्रमुख सड़कें और दर्जनों रिहायशी कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। घुटनों तक भरे पानी ने लोगों की आवाजाही रोक दी, कई घरों और दुकानों में गंदा पानी घुस गया, जबकि दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया।
बारिश से पहले नगर पालिका ने नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त होने के दावे किए थे, लेकिन पहली ही बारिश में कई स्थानों पर नाले उफन पड़े। सड़कों पर सीवर का गंदा पानी फैल गया और जगह-जगह जलभराव ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
जलभराव के बाद अब राजनीतिक जवाबदेही पर भी चर्चा तेज हो गई है। क्षेत्र में डबल इंजन सरकार होने और स्थानीय विधायक नंदकिशोर गुर्जर के नेतृत्व के बावजूद नागरिकों का कहना है कि सीवर और ड्रेनेज व्यवस्था आज भी कमजोर बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी और अधूरी परियोजनाओं का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
सिर्फ सत्ता पक्ष ही नहीं, विपक्ष भी लोगों के निशाने पर है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि संकट के समय विपक्षी दलों की सक्रियता दिखाई नहीं देती। लोगों का मानना है कि आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जमीनी समाधान और राहत कार्यों पर ध्यान देना जरूरी है।
विधायक नंदकिशोर गुर्जर का कहना है कि क्षेत्र में सीवर लाइन, सड़क चौड़ीकरण और अन्य आधारभूत परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। उनके अनुसार निर्माण कार्यों के कारण कुछ स्थानों पर अस्थायी दिक्कतें उत्पन्न हुई हैं, जिन्हें जल्द दूर कर लिया जाएगा। वहीं नगर पालिका की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पंपिंग सेट लगाकर जल निकासी का कार्य कर रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलभराव लंबे समय तक बना रहता है तो डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। दूसरी ओर, बाजारों में पानी भरने से व्यापार प्रभावित हुआ है और सड़कों पर बने गड्ढों में पानी जमा होने से दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है।
हर मानसून में दोहराई जाने वाली यह तस्वीर अब स्थायी समाधान की मांग कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, नियमित नाला सफाई, पारदर्शी कार्यप्रणाली और विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक हर बारिश लोनी के लिए परेशानी का सबब बनती रहेगी।


