महराजगंज: सरकार की डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था को नजरअंदाज करते हुए नौतनवा क्षेत्र के रतनपुर स्थित कृषि रक्षा इकाई पर बिना ई-पास मशीन के ऑफलाइन तरीके से धान बीज वितरण किए जाने का मामला सामने आया है। इस अव्यवस्था से किसानों की परेशानी बढ़ गई है और उनकी सरकारी सब्सिडी पर भी संकट मंडराने लगा है।
जानकारी के मुताबिक, पीड़ित किसानों का आरोप है कि गोदाम इंचार्ज मनमाने ढंग से बीज वितरण कर रहे हैं। बिना ई-पास मशीन के वितरण होने से किसानों के खेतों का वास्तविक रकबा सरकारी पोर्टल पर सही तरीके से दर्ज नहीं हो पा रहा है। इतना ही नहीं, कई किसानों को बीज खरीद की रसीद तक उपलब्ध नहीं कराई गई।
बता दें, गुरुवार को गोदाम प्रबंधन ने उन किसानों को दोबारा बुलाया जिन्हें पहले ऑफलाइन प्रक्रिया के तहत धान बीज दिया गया था। किसानों से ई-पास मशीन पर फिंगरप्रिंट लगवाया गया तो पोर्टल पर उनके खेतों का रकबा वास्तविक क्षेत्रफल से काफी कम दर्ज मिला। इसके चलते किसानों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी भी आधी होने की आशंका बढ़ गई।
किसानों का कहना है कि जब उन्होंने इस गड़बड़ी की शिकायत की तो गोदाम इंचार्ज ने जिम्मेदारी लेने के बजाय उन्हें जनसेवा केंद्रों पर जाकर रकबा अपडेट कराने की सलाह दे दी। इससे खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे किसानों को भीषण गर्मी में सीएससी केंद्रों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि एक दिन पहले ही जिला कृषि अधिकारी शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि किसी भी स्थिति में बिना ई-पास मशीन के धान बीज का वितरण न किया जाए। इसके बावजूद कृषि रक्षा इकाई पर पुराने और अपारदर्शी तरीके से बीज वितरण जारी रहा।
इस मामले को लेकर किसानों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखने को मिल रहा है। वहीं, गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक संबंधित कर्मचारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठने लगे हैं।


