मेरठ: ऑनलाइन मोबाइल गेम्स युवाओं की सेहत पर कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं, इसका भयावह उदाहरण मेरठ के खैरनगर इलाके से सामने आया है। जहां पबजी (PUBG) गेम की लत के चलते 22 वर्षीय युवक मोहम्मद कैफ की मौत हो गई। लगातार कई घंटों तक गेम खेलने के दौरान उसका ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया, जिससे दिमाग की नस फट गई।
देर रात गेमिंग से बिगड़ी हालत
खैरनगर की गूलर वाली गली निवासी प्रॉपर्टी डीलर फारुक का इकलौता बेटा मोहम्मद कैफ शुक्रवार की देर रात अपने कमरे में मोबाइल पर पबजी खेल रहा था। परिजनों के मुताबिक, कैफ पिछले चार महीनों से ऑनलाइन गेमिंग का आदी हो चुका था और अक्सर पूरी रात जागकर गेम खेलता रहता था। रात करीब तीन बजे अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और वह बेड से नीचे गिर पड़ा।
कमरे से आवाज न आने पर जब परिजन अंदर पहुंचे तो कैफ बेहोशी की हालत में पड़ा था। आनन-फानन में उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच में पता चला कि उसका ब्लड प्रेशर 300 से अधिक था, जिसे देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए।
इलाज के दौरान मौत
हालत की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने युवक को तुरंत दिल्ली रेफर कर दिया। दिल्ली के अस्पताल में दो दिनों तक इलाज चला, लेकिन अत्यधिक ब्रेन हैमरेज के कारण रविवार की सुबह मोहम्मद कैफ की मौत हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक मानसिक तनाव, उत्तेजना और नींद की कमी के कारण ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ा, जो जानलेवा साबित हुआ।
सोशल मीडिया से गेमिंग की लत तक
परिजनों ने बताया कि कैफ पहले सोशल मीडिया पर रील बनाने का शौकीन था, लेकिन धीरे-धीरे उसकी रुचि ऑनलाइन गेमिंग की ओर बढ़ती चली गई। पबजी की लत इतनी बढ़ गई कि वह दिन-रात मोबाइल में डूबा रहता था। परिवार ने कई बार उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी आदत नहीं छोड़ पाया।
बेटे की मौत से परिवार में मातम
मोहम्मद कैफ अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर में मातम पसरा हुआ है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
विशेषज्ञों ने जारी की चेतावनी
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ऑनलाइन गेम्स दिमाग में डोपामाइन हार्मोन को बढ़ाते हैं, जिससे व्यक्ति को बार-बार खेलने की इच्छा होती है और धीरे-धीरे लत लग जाती है। लंबे समय तक गेमिंग करने से तनाव, अनिद्रा, हाई ब्लड प्रेशर और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों और युवाओं की मोबाइल गतिविधियों पर नजर रखें।


