देवरिया: मेडिकल कॉलेज परिसर में पानी की टंकी से मिले इंजीनियर गावड़े के शव को लगभग दो माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का। इस रहस्यमयी मौत की गुत्थी सुलझाने में जनपद की सदर कोतवाली पुलिस की नाकामी अब खुद उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक की मौत दम घुटने से हुई, वहीं शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान भी पाए गए हैं। ये तथ्य मामले को और भी संदिग्ध बनाते हैं, लेकिन इसके बावजूद पुलिस किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है।
दो माह बीत जाने के बाद भी न तो किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है और न ही यह स्पष्ट हो सका है कि इंजीनियर की मौत किन परिस्थितियों में हुई। यह मामला अब सदर कोतवाली पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, देवरिया के पुलिस अधीक्षक ने मामले के खुलासे के लिए कई जांच टीमों का गठन कर शीघ्र परिणाम लाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक जांच का नतीजा शून्य नजर आ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने आम जनता के मन में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग दबी जुबान में पूछ रहे हैं कि क्या सबूतों को दबाया जा रहा है, या फिर किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने का प्रयास किया जा रहा है?
अब सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि जिले की कानून व्यवस्था और पुलिस की पारदर्शिता का भी बन गया है। आम नागरिक पुलिस कप्तान, थाना पुलिस और यहां तक कि उत्तर प्रदेश सरकार से भी यह जानना चाहते हैं कि क्या देवरिया में कानून व्यवस्था सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित रह गई है?


