Hindi Express News
  • August 22, 2026
  • Last Update August 17, 2026 8:12 AM
  • Lucknow

ट्रोनिका सिटी में नकली दवा कांड पर बड़ा सवाल: सील फैक्ट्री से कैसे जले सबूत? प्रशासनिक लापरवाही या अंदरूनी मिलीभगत?

ट्रोनिका सिटी में नकली दवा कांड पर बड़ा सवाल: सील फैक्ट्री से कैसे जले सबूत? प्रशासनिक लापरवाही या अंदरूनी मिलीभगत?

गाजियाबाद: थाना ट्रोनिका सिटी क्षेत्र अंतर्गत लोनी के मीरपुर इलाके में पकड़ी गई नकली दवाइयों की फैक्ट्री अब एक बड़े सवाल में बदलती जा रही है। प्रशासन और औषधि विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद फैक्ट्री को सील कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद फैक्ट्री परिसर से रॉ मटेरियल जलाए जाने की घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह अवैध फैक्ट्री बीते सितंबर माह से संचालित की जा रही थी। यहां नामी और प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के ब्रांड की नकल कर नकली दवाइयां तैयार की जा रही थीं, जिन्हें स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी सप्लाई किया जा रहा था। गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में भारी मात्रा में तैयार और अधबनी नकली दवाइयां, कच्चा माल, पैकिंग मशीनें, लेबल और अन्य उपकरण बरामद किए गए थे।

जलाए गए सबूत

छापेमारी के दौरान फैक्ट्री में काम कर रहे कर्मचारियों से पूछताछ की गई और मुख्य संचालक को हिरासत में लेकर फैक्ट्री को सील कर दिया गया। औषधि विभाग ने बरामद दवाइयों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे, ताकि उनकी गुणवत्ता और रासायनिक संरचना की पुष्टि की जा सके। अधिकारियों का कहना था कि रिपोर्ट आने के बाद संबंधित धाराओं में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन मामला उस समय संदिग्ध हो गया जब स्थानीय लोगों ने फैक्ट्री परिसर से रॉ मटेरियल जलाए जाने की सूचना दी। सवाल यह उठता है कि जब फैक्ट्री सील थी, तो वहां तक पहुंच किसकी थी और किसके इशारे पर सबूत नष्ट किए गए। क्या यह पुलिस और प्रशासन की घोर लापरवाही है या फिर इस पूरे गोरखधंधे में किसी स्तर पर मिलीभगत मौजूद है?

इस प्रकरण में फैक्ट्री के मकान मालिक की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। आरोप है कि बिना किसी वैध कागजात और सत्यापन के लंबे समय से यहां अवैध गतिविधियां चल रही थीं। यह भी जांच का विषय है कि मकान मालिक को नकली दवाइयों के निर्माण की जानकारी थी या नहीं, और क्या उसने जानबूझकर इस अवैध कारोबार को संरक्षण दिया।

नकली दवाइयों का कारोबार सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर अपराध है। ऐसे में सील की गई फैक्ट्री से सबूतों का नष्ट होना जांच प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है और दोषियों को बचने का मौका दे सकता है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी रोष है और वे पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि इस गोरखधंधे से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि सील फैक्ट्री से सबूत जलने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

author

Related Articles

error: Content is protected !!