लखनऊ: हैदराबाद में आयोजित विजन इंडिया एआई (AI) समिट के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश की राजनीति और तकनीक के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में “डिवीजन नहीं, विजन” की राजनीति होनी चाहिए।
समाजवादी पार्टी विकास और प्रगतिशील राजनीति में विश्वास करती है, जबकि भाजपा समाज को बांटने की राजनीति कर रही है। देश में बढ़ती बंटवारे की राजनीति को रोकना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
अखिलेश यादव ने कहा कि दुनिया तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। किसी भी नागरिक के साथ जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में AI ऐसा माध्यम बने, जिससे समाज में फैला भेदभाव खत्म किया जा सके।
उन्होंने AI के सकारात्मक उपयोगों पर बात करते हुए कहा कि ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में इससे बड़ी सुविधाएं मिल सकती हैं, लेकिन इसके दुरुपयोग को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्लेटफॉर्म पर AI और डीप फेक वीडियो का गलत इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे लोकतंत्र को नुकसान पहुंच रहा है।
उत्तर प्रदेश में साइबर फ्रॉड को लेकर उन्होंने कहा कि प्रदेश इस मामले में देश में नंबर वन बन चुका है और ऑनलाइन स्कैम लगातार बढ़ रहे हैं। एक्सप्रेस-वे पर कैमरों से वाहनों के अंदर तक वीडियो रिकॉर्ड होने की खबरों का जिक्र करते हुए उन्होंने निजता के उल्लंघन पर चिंता जताई।
एसआईआर को लेकर अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग का काम वोट बनवाना है, किसी का वोट काटना नहीं। उनका आरोप है कि एसआईआर के बहाने एनआरसी लागू की जा रही है और उत्तर प्रदेश में करीब तीन करोड़ लोगों के वोट काटे जा रहे हैं।
अखिलेश ने दावा किया कि एसआईआर में जिस कंपनी का मैपिंग ऐप इस्तेमाल हो रहा है, वही कंपनी भाजपा को इलेक्टोरल बॉन्ड दे चुकी है।उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी, तब AI का बेहतर और जनहितकारी उपयोग कर आम जनता को लाभ पहुंचाया जाएगा।


