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  • August 22, 2026
  • Last Update August 17, 2026 8:12 AM
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ट्रैफिक नियमों पर दोहरा मापदंड! गाजियाबाद में सरकारी कर्मचारी खुलेआम कर रहे MV Act का उल्लंघन

ट्रैफिक नियमों पर दोहरा मापदंड! गाजियाबाद में सरकारी कर्मचारी खुलेआम कर रहे MV Act का उल्लंघन

गाजियाबाद: जनपद में यातायात नियमों के उल्लंघन पर आम नागरिकों के खिलाफ ट्रैफिक विभाग द्वारा सख्त कार्रवाई की जाती है। बिना हेलमेट, गलत नंबर प्लेट, ओवरस्पीड या अन्य नियमों की अनदेखी पर तुरंत चालान काटा जाता है लेकिन जब यही नियम सरकारी कर्मचारी पर लागू होने की बात आती है, तो कानून की समानता पर सवाल खड़े हो जाते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी निजी गाड़ी पर “उत्तर प्रदेश सरकार” नहीं लिखवाएगा। ऐसा करना मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) का उल्लंघन है और इसे सरकारी पद के दुरुपयोग की श्रेणी में माना जाता है। नियमों के अनुसार, ऐसा पाए जाने पर वाहन का चालान, जुर्माना और संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तक का प्रावधान है।

इसके बावजूद गाजियाबाद में खुलेआम इन निर्देशों की अनदेखी किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, श्रम विभाग में तैनात एक सहायक निदेशक (कारखाना) कृपान्शु पर आरोप है कि वे निजी उपयोग में ली जा रही कार UP 14 GS 9536 का प्रयोग कर रहे हैं, जिस पर “उत्तर प्रदेश सरकार” अंकित है। बताया जा रहा है कि यह वाहन सरकारी नहीं बल्कि निजी है, इसके बावजूद उस पर सरकारी पहचान का उपयोग किया जा रहा है।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी पद का दुरुपयोग भी माना जाएगा। सवाल यह भी उठता है कि जब आम नागरिकों के लिए नियम सख्ती से लागू किए जाते हैं, तो सरकारी कर्मचारियों के मामलों में ऐसी अनदेखी क्यों?

यह मामला अब प्रशासन और ट्रैफिक विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गाजियाबाद के जिलाधिकारी और ट्रैफिक पुलिस इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करते हैं या नहीं।

कानून का मूल सिद्धांत यही है कि वह सबके लिए समान हो, चाहे वह आम नागरिक हो या सरकारी पद पर आसीन अधिकारी। अब देखना यह है कि इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई होती है या मामला सिर्फ सवाल बनकर ही रह जाएगा।

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