Insurnace Premium: GST में छूट का मतलब है कि प्रीमियम पर कोई अतिरिक्त लागत नहीं होगी। लेकिन आपको जो बचत दिखाई देगी, वह इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां पॉलिसियों की कीमत कैसे तय करती हैं। जीएसटी हटाने से पहले बीमा कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा करती थीं, अब यह लाभ नहीं रहेगा।
Arun Kumar (Reporter)
अपडेटेड8 Sep 2025, 04:36 PM IST
इंश्योरेंस पर जीएसटी खत्म होने का कितना मिलेगा फायदा?
जीएसटी काउंसिल (GST Council) के हालिया फैसले से व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम (Life and Health Insurnace) पर जीएसटी समाप्त हो गया है। यह फैसला 22 सितंबर से लागू होगा, जिससे पॉलिसीधारकों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, क्या आपको वास्तव में 18% की पूरी बचत मिलेगी? इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करेगा कि बीमा कंपनियां अपनी कीमतों में कैसे बदलाव करती हैं। आइए जानते हैं कि जीएसटी हटाने से आपको कितना वास्तविक फायदा मिल सकता है और क्या हैं इसके साथ जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें।
क्या है जीएसटी छूट का सीधा असर?
पहली नजर में जीएसटी हटाने से आपको सीधा फायदा दिखाई देगा। अगर पहले आप ₹1,000 के प्रीमियम पर 18% जीएसटी यानी ₹1,180 चुकाते थे, तो अब आपको केवल ₹1,000 ही देने होंगे, लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं है।
बीमा कंपनियों के सामने दो विकल्प
जीएसटी छूट के बाद बीमा कंपनियों के पास दो विकल्प हैं- पहला कि वे अपने मुनाफे के मार्जिन में कमी करके खुद नुकसान उठा लें। ऐसा हुआ तो आपको 18% की पूरी बचत मिलेगी। दूसरा विकल्प ये है कि कंपनियां बेस प्रीमियम को बढ़ाकर अपनी लागत की भरपाई कर लें। कंपनियां इनमें किस रास्ते पर जाएंगी, यह बाजार की गतिशीलता पर निर्भर करेगा।
बचत पर असर और पारंपरिक पॉलिसियों पर प्रभाव
टर्म इंश्योरेंस जैसे प्रतिस्पर्धी सेगमेंट में कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी बाजार हिस्सेदारी कम कर सकती है। इसलिए, कंपनियां ग्राहकों को खोने के जोखिम से बचने के लिए कम मार्जिन के साथ काम करना पसंद कर सकती हैं।
हालांकि, पारंपरिक बचत योजनाओं जैसे एंडोमेंट या यूलिप (Endowment and ULIP Schemes) में लाभ कम प्रीमियम के बजाय ज्यादा रिटर्न में दिखाई दे सकता है। पहले जब आप इन योजनाओं में एक लाख रुपये निवेश करते थे तो एक हिस्सा जीएसटी में चला जाता था, लेकिन अब वह हिस्सा भी निवेश में जाएगा और उस पर रिटर्न मिलेगा। इस तरह, 1 लाख रुपये के निवेश पर ही पहले के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिलेगा।
क्लेम सेटलमेंट और जोखिम पूल पर प्रभाव
जीएसटी छूट से क्लेम सेटलमेंट बेहतर हो सकता है क्योंकि कम प्रीमियम से अधिक लोग बीमा लेने के लिए प्रेरित हो सकते हैं, जिससे रिस्क पूल मजबूत होगा। यह बीमा कंपनियों के लिए क्लेम का प्रबंधन करना और ग्राहकों के लिए टिकाऊ बनाना आसान बना सकता है। ईटी वेल्थ पर प्रकाशित एक लेख के लिए कवरश्योर के फाउंडर औरसीईओ सौरभ विजयवर्गीय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इंश्योरेंस पर जीएसटी हटने से कंपनियों के लिए रिस्क पूल कम और क्लेम्स कम हो सकते हैं।
दरअसल, महंगा होने के कारण इंश्योरेंस वही लोग लेते हैं जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी खतरा महसूस होता है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में इंश्योरेंस लेने वाले ज्यादातर लोगों की उम्र 45 वर्ष से अधिक है। इस उम्र में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ना स्वाभाविक है, इसलिए कंपनियों के पास क्लेम ज्यादा आते हैं। लेकिन जब प्रीमियम कम होगा तो कम उम्र के और स्वस्थ लोग भी सस्ता इंश्योरेंस लेने की सोचने लगेंगे। इससे कंपनियों के पास क्लेम कम आएगा क्योंकि कम उम्र और स्वस्थ लोगों के बीमार पड़ने की आशंका घट जाती है।
पॉलिसी प्रीमियम में बदलावों पर रखें नजर
जीएसटी छूट से बीमा प्रीमियम में कमी आएगी, लेकिन वास्तविक बचत बीमा कंपनियों के निर्णय पर निर्भर करेगी। इसलिए, आपको अपनी पॉलिसी के प्रीमियम में हुए बदलावों को ध्यान से देखना चाहिए। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियामकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, यह एक सकारात्मक कदम है जो बीमा को अधिक किफायती बना सकता है और अधिक लोगों को बीमा कवच प्रदान कर सकता है।


